हिमाचल प्रदेश के वित्त विभाग की कार्य प्रणाली पर उठे अनेको प्रश्न
हिमाचल प्रदेश के वित्त विभाग की कार्य प्रणाली पर उठे अनेको प्रश्न
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर न्यू पेंशन स्कीम दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत कर्मचारी अधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव गुलेरिया ने आज एक प्रेस विज्ञाप्ति में यह बयान जारी करते हुए हिमाचल प्रदेश के वित्त विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जहां माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ़ ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पेंशन के लिए कर्मचारियों के अनुबंध सेवाकाल को जोड़ने का आदेश दिया है वहीं दूसरी ओर वित्त विभाग अपनी मनमर्जी चलाकर मुख्यमंत्री के आदेशों और न्यायपालिका के सम्मान को ठेंगा दिखा रहा है। क्या व्यवस्था परिवर्तन सरकार का प्रशासन सत्तादारी पार्टी की सरकार से अधिक ऊंचा है l डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश में अफसरशाही बेलगाम हो गई है। 16 फरवरी को जारी वित्त विभाग के निर्देश जिसमें अनुबंध काल को पेंशन लाभ में न गिनने की बात कही गई है, वह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कर्मचारी हितैषी दृष्टिकोण की धज्जियां उड़ाने जैसा है। उन्होंने उन विभागाध्यक्षों की भी कड़े शब्दों में निंदा की, जो स्वयं पुरानी पेंशन का लाभ ले रहे हैं लेकिन एन पी एस कर्मचारियों के प्रति तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं। डॉ. गुलेरिया ने मुख्यमंत्री सुक्खू की सराहना करते हुए कहा कि कर्मचारियों को ओ पी एस बहाल कर उन्होंने जो "बुढ़ापे का सहारा" दिया है, उससे कर्मचारियों में खुशी की लहर है। अब हमें पूर्ण विश्वास है कि मुख्यमंत्री अपनी सकारात्मक सोच का परिचय देते हुए निम्नलिखित मांग पर भी त्वरित निर्णय लेंगे l
"मुख्यमंत्री सुक्खू ने हमेशा कर्मचारियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।डॉ. गुलेरिया ने अंत में कहा कि कर्मचारी वर्ग सरकार की रीढ़ है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार वित्त विभाग की इस हठधर्मिता को समाप्त कर कर्मचारियों को उनका वाजिब हक दिलाएगी।


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