विरासत में छोड़ गए फलदार वृक्षों से भरा एक जंगल
विरासत में छोड़ गए फलदार वृक्षों से भरा एक जंगल
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर सेवा मुक्त होने के बाद जंगल व शामलात भूमि में पौधे लगाना बन गया था ज्ञानचंद का मिशन l यह दास्तान है प्रदेश के विधानसभा क्षेत्र नूरपुर के एक हिमाचल पथ परिवहन निगम के सेवानिवृत कर्मचारी कीlआज के दौर में जहां आए दिन जंगलों से पेड़ो के बेरहमी से काटे जाने के समाचार अक्सर आते रहते हैं वहां कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनका मिशन ही जंगलों में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाकर उसे स्थिति में पहुंचना होता है जहां यह फलदार पेड़ पशु पक्षियों का पेट भर सके व पर्यावरण हो सकेl नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की गनोह वैल्ट के गांव भटोली लमया के निवासी ज्ञानचंद शर्मा हिमाचल पथ परिवहन निगम में चालक थे जो न सिर्फ अपने सेवा काल के दौरान गांव के समीपी जंगल व शामलात भूमि में फलदार पौधे लगाने का काम पूरे जुनून से करते रहे हैंl उनके बेटे लेखराज जो कि इस पंचायत के प्रधान भी रह चुके हैं उनका कहना है कि जंगल व शामलात भूमि इस प्रकार के फलदार वृक्ष लगाने के पीछे उनके पिता की यह सोच थी कि इनमें रहने वाले पशु पक्षियों के पेट को भरे जाने की व्यवस्था होनी चाहिएl उनके पिता ज्ञानचंद ने सरकारी पद से अवकाश प्राप्त करने के बाद इस कार्य के लिए जीवन समर्पित कर दिया उनकी मेहनत का परिणाम है कि आज गांव के समिति जंगलों में अनेक हवलदार वृक्ष लहलहा रहे हैं l


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