नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर जंगलात भूमि पर बनी सड़क की जांच, प्रशासन में हड़कंप !
नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर जंगलात भूमि पर बनी सड़क की जांच, प्रशासन में हड़कंप !
ज्वाली : राजेश कतनौरिया /
ज्वाली नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशानुसार ज्वाली विधानसभा की ग्राम पंचायत नाणा में जंगलात भूमि पर बनी लगभग ढाई किलोमीटर लंबी सड़क को लेकर बड़ी जांच की गई। जांच के दौरान प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई।
मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
जांच के लिए
नरेंद्र सिंह जरियाल, एसडीएम ज्वाली
संदीप कोहली, डीएफओ नूरपुर
रेजीनॉड रॉयलस्टोन, वाइल्ड लाइफ डीएफओ हमीरपुर
अधिकारियों ने डोबा गांव से लेकर दिल्लू दीन के घर तक जंगल के बीच बनाए गए रास्ते का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया।
घने जंगल के बीच सड़क… किसने दी अनुमति?
मामले के शिकायतकर्ता एवं पूर्व प्रधान ओंकार सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क जंगलात भूमि पर बनाई गई है। उनका दावा है कि घने जंगल से रास्ता निकालने के दौरान लाखों की संख्या में कीमती जड़ी-बूटियों, पेड़-पौधों और वन संपदा को नुकसान पहुंचाया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी परियोजना की अनुमति किसने दी और निर्माण पर खर्च की राशि कहां से आई?
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि यदि यह 40-50 वर्ष पुराना रास्ता था, तो फिर मौके पर भारी मशीनरी (जेसीबी) के ताजा निशान क्यों दिखाई दे रहे हैं?
6 मरले भूमि आबंटन पर भी उठे सवाल
मामले का दूसरा पहलू राजस्व विभाग से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि वर्ष 2020-21 में घने जंगल के बीच लगभग 6 मरले भूमि एक व्यक्ति को अलॉट की गई, जबकि उसके नाम पहले से अन्य स्थानों पर पर्याप्त भूमि दर्ज है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह आबंटन नियमों के विरुद्ध प्रतीत होता है, जिस कारण उन्हें NGT का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अधिकारियों के बयान
एसडीएम ज्वाली का पक्ष
एसडीएम नरेंद्र सिंह जरियाल ने कहा,
“अलॉटमेंट के कागजात देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यदि आबंटन अवैध पाया गया तो उसे रद्द किया जाएगा।”
डीएफओ नूरपुर का पक्ष
डीएफओ संदीप कोहली ने बताया,
“स्थानीय लोगों के अनुसार यह रास्ता 40-50 वर्ष पुराना है। संबंधित व्यक्ति को 4-5 साल पहले भूमि अलॉट हुई है। संभव है कि रास्ता पहले से मौजूद रहा हो।”
हालांकि जब उनसे पूछा गया कि सड़क का निर्माण जेसीबी से हुआ या मैन्युअली, तो उन्होंने कहा कि जांच की जायेगी यह रास्ता कैसे वना है !


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