भारतीय जनता पार्टी का सांस्कृतिक संकल्प और कांग्रेस पर प्रहार
भारतीय जनता पार्टी का सांस्कृतिक संकल्प और कांग्रेस पर प्रहार
संगठनात्मक जिला पालमपुर में प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की कार्यशाला से उठी हुंकार ..विपिन सिंह परमार
पालमपुर
संगठनात्मक जिला पालमपुर में आज भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की परिचय बैठक एवं कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों ने भाग लेकर भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रवादी मूल्यों के संरक्षण व संवर्धन पर गंभीर और सार्थक मंथन किया। बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि “संस्कृति ही राष्ट्र की आत्मा है, और जब आत्मा सशक्त होती है तो राष्ट्र स्वयं सशक्त बनता है।”
बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि यह जीवन पद्धति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभावना का आधार है। भाजपा का सांस्कृतिक प्रकोष्ठ संगठन का वह सशक्त अंग है जो लोकनृत्य, लोकसंगीत, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करता है। युवाओं को भारतीय सभ्यता से जोड़ने के लिए संगोष्ठियां, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक अभियान चलाए जाते हैं, ताकि राष्ट्रवाद केवल विचार न रहे, बल्कि जन-जन का व्यवहार बने।
उन्होंने कहा कि गांव-गांव तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया गया है। स्थानीय कलाकारों को मंच देना और सांस्कृतिक जागरण के माध्यम से समाज को जोड़ना भाजपा की प्राथमिकता है। कार्यक्रम में संगठनात्मक एकजुटता, ऊर्जा और राष्ट्रभावना का विशेष वातावरण देखने को मिला। सभी पदाधिकारियों ने संकल्प लिया कि भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समर्पित भाव से कार्य किया जाएगा।
“हिमाचल भवन और सदन को षड्यंत्र का अड्डा नहीं बनने देंगे”
सांस्कृतिक चेतना की इसी पृष्ठभूमि में विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस सरकार पर तीखा और सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रनिर्माण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की कांग्रेस सरकार हिमाचल की प्रतिष्ठा को राजनीतिक ड्रामे और आधी रात की रणनीतियों में दांव पर लगा रही है।
परमार ने कहा कि हिमाचल भवन और हिमाचल सदन प्रदेश की अस्मिता और पहचान के प्रतीक हैं। इन्हें किसी भी प्रकार से राजनीतिक षड्यंत्र, शक्ति प्रदर्शन या अराजक गतिविधियों का मंच नहीं बनने दिया जाएगा। यदि किसी ने बुकिंग, आवास या प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन किया है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होना स्वाभाविक है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि आधी रात को जो घटनाक्रम हुआ, वह सामान्य प्रक्रिया थी या सुनियोजित राजनीतिक नाटक?
संवैधानिक अज्ञान या राजनीतिक नौटंकी?
विपिन सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को “संघीय ढांचे पर हमला” बताना संवैधानिक तथ्यों से परे है। कानून-व्यवस्था किसी दल की निजी संपत्ति नहीं होती। यदि नियम टूटे हैं तो कार्रवाई होगी—चाहे कोई भी हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का चरित्र दोहरे मापदंडों से भरा है। जब तक नियम उनके पक्ष में हों, सब ठीक; लेकिन जैसे ही कानून अपना काम करे, उसे राजनीतिक रंग देकर पीड़ित बनने की कोशिश की जाती है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सुनियोजित सहानुभूति की राजनीति है।
राज्यसभा और ‘हाईकमान संस्कृति’ की बेबसी
परमार ने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर स्वयं मुख्यमंत्री का यह कहना कि उम्मीदवार का निर्णय “हाईकमान” करेगा, हिमाचल कांग्रेस की निर्भर मानसिकता को उजागर करता है। क्या प्रदेश में योग्य नेताओं की कमी है? क्या हिमाचल की आवाज दिल्ली दरबार तय करेगा?
उन्होंने कहा कि भाजपा में संगठन और प्रदेश नेतृत्व सर्वोपरि होता है, जबकि कांग्रेस में आज भी टिकट और पद दिल्ली की चौखट पर तय होते हैं। यही दरबारी संस्कृति वर्षों तक प्रदेश को गुटबाजी और अस्थिरता में उलझाए रखती है।
आर्थिक मोर्चे पर भी घिरी सरकार
विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। प्रदेश की वित्तीय स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और विकास कार्यों में देरी—क्या यही “व्यवस्था परिवर्तन” था?
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जनहित से अधिक राजनीतिक समीकरण साधने में व्यस्त है। कभी संगठन में गुटबाजी, कभी राज्यसभा सीट को लेकर लॉबिंग—प्रदेश की प्राथमिकताएं पीछे छूट चुकी हैं।
भाजपा का स्पष्ट रुख
विपिन सिंह परमार ने दो टूक कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
प्रदेश की आवाज का निर्णय प्रदेश में होना चाहिए, न कि दिल्ली में।
आर्थिक मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए, न कि उनका राजनीतिक दुरुपयोग।
उन्होंने कहा कि भाजपा सांस्कृतिक चेतना, संगठनात्मक मजबूती और विकास के स्पष्ट एजेंडे के साथ आगे बढ़ रही है। पालमपुर की कार्यशाला इसका प्रमाण है कि भाजपा केवल राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की व्यापक दृष्टि लेकर कार्य कर रही है।
“आधी रात की राजनीति अब नहीं चलेगी”
विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस की “आधी रात की राजनीति” और “दिन में हाईकमान की बेबसी” अब जनता के सामने उजागर हो चुकी है। हिमाचल को स्थिर नेतृत्व, स्पष्ट नीति और निर्णायक सरकार चाहिए—न कि बयानबाजी और निर्भरता।
उन्होंने दोहराया कि भाजपा प्रदेश की अस्मिता, संस्कृति और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। हिमाचल भवन और सदन को किसी भी सूरत में षड्यंत्र का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।
सांस्कृतिक जागरण से लेकर संवैधानिक मर्यादा की रक्षा तक—भाजपा हर मोर्चे पर सजग है, और जनता के हित में निर्णायक संघर्ष जारी रहेगा। इस अवसर पर प्रदेश प्रकोष्ठों के प्रभारी पुरषोत्तम गुलेरिया, जिला अध्यक्ष रागिनी रकवाल, प्रदेश सयोंजक करनैल राणा, धीरज शर्मा, पंकज शर्मा, मनोज मनु, अजय भारद्वाज, शक्ति चंद राणा, राजेश रानू, नेक चंद, जोगिंद्र राणा तथा अन्य मौजूद रहे।


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