राजकीय महाविद्यालय रिवालसर में रोवर-रेंजर स्वयंसेवियों ने सीखी स्काउटिंग की बारीकियां बेसिक गांठों का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण, आगामी शिविर के लिए किया तैयार
राजकीय महाविद्यालय रिवालसर में रोवर-रेंजर स्वयंसेवियों ने सीखी स्काउटिंग की बारीकियां
बेसिक गांठों का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण, आगामी शिविर के लिए किया तैयार
अजय सूर्या नेरचौक। राजकीय महाविद्यालय रिवालसर, जिला मंडी की रोवर-रेंजर इकाई के तत्वावधान में स्वयंसेवियों के लिए स्काउटिंग की आधारभूत जानकारी एवं बेसिक स्काउटिंग गांठों (बेसिक स्काउटिंग कनॉट) पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को स्काउटिंग के मूल सिद्धांतों के साथ विभिन्न प्रकार की गांठें बांधने और उनके व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण सत्र में रोवर स्काउट लीडर डॉ. कुलदीप कुमार, रेंजर लीडर डॉ. अंजली परमार तथा राष्ट्रपति स्काउट रोहित ने प्रशिक्षकों की भूमिका निभाते हुए स्वयंसेवियों को स्काउटिंग की महत्वपूर्ण तकनीकों से अवगत करवाया। उन्होंने विभिन्न प्रकार की गांठें बांधने की विधि का प्रदर्शन किया तथा स्वयंसेवियों को अभ्यास के माध्यम से इन तकनीकों को सीखने का अवसर प्रदान किया।
प्रशिक्षकों ने बताया कि स्काउटिंग गतिविधियों में गांठों का विशेष महत्व होता है। शिविरों के दौरान टेंट लगाने, पायनियरिंग गतिविधियों, रस्सियों को आपस में जोड़ने तथा आपातकालीन एवं बचाव कार्यों में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इन तकनीकों का ज्ञान स्वयंसेवियों को कठिन परिस्थितियों में भी सूझबूझ और आत्मविश्वास के साथ कार्य करने में सक्षम बनाता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आगामी रोवर-रेंजर शिविर के लिए स्वयंसेवियों को तैयार करना तथा उन्हें शिविर से जुड़ी आवश्यक सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना रहा।
इस अवसर पर महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. ब्रज नंदन ने स्वयंसेवियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्काउटिंग केवल किताबी या सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मनिर्भरता, सहयोग, नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने इस प्रकार की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
महाविद्यालय की रोवर-रेंजर इकाई द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को न केवल व्यावहारिक कौशल सीखने का अवसर मिलता है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और समाजसेवा की भावना भी मजबूत होती है।

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