आत्मनिर्भर हिमाचल का नारा महज़ राजनीतिक जुमला, कांग्रेस सरकार ने विकास की रीढ़ तोड़ी : बिक्रम ठाकुर
आत्मनिर्भर हिमाचल का नारा महज़ राजनीतिक जुमला, कांग्रेस सरकार ने विकास की रीढ़ तोड़ी : बिक्रम ठाकुर
कहा,,विधायक प्राथमिकता कार्यों पर ताला लगाकर जनादेश का अपमान, मुख्यमंत्री विकास विरोधी एजेंडे पर चल रहे
धर्मशाला 2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल का स्वप्न दिखाने वाली कांग्रेस सरकार की असलियत अब प्रदेश की जनता के सामने उजागर हो चुकी है। पूर्व उद्योग मंत्री एवं भाजपा वरिष्ठ नेता बिक्रम ठाकुर ने धर्मशाला से जारी तीखे बयान में कहा कि वर्तमान सरकार ने विकास कार्यों पर पूर्ण विराम लगाकर हिमाचल को आर्थिक और प्रशासनिक ठहराव की ओर धकेल दिया है। विधायक प्राथमिकताओं को केवल एक योजना तक सीमित करना इस बात का प्रमाण है कि सरकार आर्थिक कुप्रबंधन और वित्तीय दिवालियेपन को छिपाने के लिए विकास पर कैंची चला रही है।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि प्राथमिकता बैठकें अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। जनप्रतिनिधियों को बुलाकर दिखावे की राजनीति की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि विधायकों के अधिकारों को सुनियोजित ढंग से सीमित किया जा रहा है। पहले सड़क, पेयजल, सिंचाई, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं की दो-दो योजनाएं प्राथमिकता में शामिल होती थीं, जिससे क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव होता था। लेकिन अब एक योजना तक सीमित कर देना यह दर्शाता है कि सरकार विकास नहीं, बल्कि नियंत्रण की राजनीति कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक क्षेत्र विकास निधि की किश्तें समय पर जारी नहीं की जा रहीं। जहां पहले वर्ष में चार किश्तें स्वीकृत होती थीं, वहीं अब दो किश्तें जारी कर शेष राशि पर ताला जड़ दिया गया है। अनेक क्षेत्रों में स्वीकृत विकास कार्य धनराशि के अभाव में अधर में लटके पड़े हैं। सरकार की न तो वित्तीय स्थिति सुदृढ़ है और न ही विकास के प्रति कोई स्पष्ट इच्छाशक्ति दिखाई दे रही है। यह सीधा-सीधा जनादेश का अपमान और लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीतियां भेदभावपूर्ण और क्षेत्रीय असंतुलन को बढ़ावा देने वाली हैं। कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को राजनीतिक आधार पर प्राथमिकता देकर शेष प्रदेश को उपेक्षित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को सबसे अधिक नुकसान होगा, जहां पहले से ही आधारभूत ढांचे की स्थिति कमजोर है। सड़क, पुल, पेयजल और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर रोक लगाना जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
बिक्रम ठाकुर ने वर्ष 2023 की भीषण आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस त्रासदी में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों, पुलों और सार्वजनिक ढांचे की मरम्मत आज तक पूर्ण रूप से नहीं हो सकी है। कई स्थानों पर कागज़ों में बहाली दिखा दी गई, पर जमीनी सच्चाई यह है कि अनेक मार्गों पर अभी तक नियमित बस सेवाएं बहाल नहीं हो पाई हैं। ग्रामीण जनता आज भी आवागमन की गंभीर कठिनाइयों से जूझ रही है। आपदा से उबरने में विफल सरकार अब नई योजनाओं पर भी रोक लगाकर प्रदेश को विकासहीनता की खाई में धकेल रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बड़े मंचों से आत्मनिर्भरता की बातें करते हैं, लेकिन आत्मनिर्भरता केवल भाषणों से नहीं आती। आत्मनिर्भर हिमाचल का अर्थ है मजबूत आधारभूत संरचना, पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन, रोजगार के अवसरों का सृजन और जनता को बुनियादी सुविधाओं की गारंटी। वर्तमान सरकार इन सभी मोर्चों पर विफल साबित हुई है। आर्थिक संकट, बढ़ता कर्ज और विकास कार्यों पर विराम— यही कांग्रेस शासन की असली पहचान बन चुकी है।
बिक्रम ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विधायक अधिकारों में कटौती और क्षेत्रीय विकास में भेदभाव की नीति तुरंत वापस नहीं ली, तो भाजपा इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक प्रखरता से उठाएगी। प्रदेश की जनता अब समझ चुकी है कि कांग्रेस के वादे केवल खोखले घोषणापत्र तक सीमित हैं। भाजपा प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा विकास विरोधी नीतियों के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष करेगी।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें