“सुलह की उपेक्षा पर परमार का प्रहार: अधूरे कार्य तुरंत पूरे करे सरकार, वरना आंदोलन को रहे तैयार” - विपिन सिंह परमार

 “सुलह की उपेक्षा पर परमार का प्रहार: अधूरे कार्य तुरंत पूरे करे सरकार, वरना आंदोलन को रहे तैयार” - विपिन सिंह परमार


पालमपुर

सुलह विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं भाजपा उपाध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि सुलह में आधे-अधूरे पड़े भवन और अधूरी योजनाएं सरकार की नाकामी का जीता-जागता प्रमाण हैं। उन्होंने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “जो भवन अधूरे पड़े हैं, जो योजनाएं लटकी हुई हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से शुरू कर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, अन्यथा सरकार बड़े जनआंदोलन के लिए तैयार रहे। परमार ने दो टूक शब्दों में कहा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर कांग्रेस की बेरुखी

भवारना अस्पताल का लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला अत्याधुनिक भवन भाजपा सरकार की बड़ी उपलब्धि था। इसका निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन आज अधूरा पड़ा है। थुरल अस्पताल भवन का कार्य भी ठप है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार, स्वास्थ्य उपकेंद्रों के सुदृढ़ीकरण और सुलह पीएचसी को सीएचसी का दर्जा दिलाने जैसे कदम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के उद्देश्य से उठाए गए थे।

परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार यदि चाहती तो इन कार्यों को और गति दे सकती थी, लेकिन दुर्भाग्य से उसने विकास को प्राथमिकता ही नहीं दी। स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा को भी राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया है।

शिक्षा और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़

आईटीआई भवन, जिसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका था, आज भी अधूरा पड़ा है। सुलह में प्रस्तावित फार्मेसी कॉलेज, जिसकी घोषणा और भूमि आवंटन भाजपा सरकार के समय हुआ, आज तक अपने पूर्ण स्वरूप में नहीं बन पाया। छात्र-छात्राएं किराए के भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

14 नई पंचायतों के भवनों के लिए 33-33 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी। कई स्थानों पर निर्माण शुरू हुआ, लेकिन आज भी पंचायतें किराए के भवनों में संचालित हो रही हैं। परमार ने कहा, “क्या कांग्रेस सरकार को ग्रामीण प्रशासन की मजबूती से कोई सरोकार नहीं है?”

किसान और ग्रामीण विकास योजनाओं पर रोक

किसान भवन, विशेषकर रमेहड़ पंचायत सहित अन्य स्थानों पर, अधूरे पड़े हैं। उठाऊ सिंचाई योजना रोड़ा दाटी (151 लाख रुपये, 48 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई) जैसी योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने के लिए शुरू की गई थीं। हर घर नल योजना के तहत 150 लाख रुपये की लागत से 434 नल कनेक्शन और 12 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ हुआ था।

पशु चिकित्सालय भवन (जैसे क्यारवां में 72 लाख रुपये) और संपर्क मार्गों के निर्माण भी भाजपा सरकार की प्राथमिकता में थे। लेकिन कांग्रेस सरकार ने इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।

कांग्रेस सरकार कटघरे में

विपिन सिंह परमार ने कहा, “प्रदेश की कांग्रेस सरकार सुलह के विकास कार्यों को ठंडे बस्ते में डालकर यह संदेश दे रही है कि उसे क्षेत्र की जनता की कोई चिंता नहीं है। भाजपा सरकार के समय स्वीकृत और प्रारंभ किए गए कार्यों को रोकना दुर्भावना से प्रेरित कदम है।”

उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस सरकार ने सुलह विधानसभा क्षेत्र के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है। करोड़ों रुपये की योजनाओं को लटकाकर क्षेत्र की प्रगति को बाधित किया गया है। यह प्रशासनिक अक्षमता और राजनीतिक प्रतिशोध की पराकाष्ठा है।

तत्काल कार्रवाई की मांग

परमार ने मांग की कि भवारना अस्पताल भवन, थुरल अस्पताल, आईटीआई भवन, फार्मेसी कॉलेज, किसान भवन और पंचायत भवनों सहित सभी अधूरी परियोजनाओं को तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो भाजपा जनहित में व्यापक आंदोलन छेड़ेगी। “सुलह को विकसित विधानसभा क्षेत्र बनाना मेरा संकल्प है। विकास के नाम पर राजनीति किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी,” उन्होंने कहा।

जनता से आह्वान

विपिन सिंह परमार ने सुलह की जनता से अपील की कि वे विकास के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करें और कांग्रेस सरकार से जवाब मांगें। उन्होंने कहा कि भाजपा हर मंच पर सुलह के अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी और अधूरे कार्यों को हर हाल में पूरा करवाएगी।

परमार ने दोहराया कि सुलह की जनता ने विकास के लिए भाजपा पर विश्वास जताया था और वह विश्वास किसी भी कीमत पर टूटने नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस सरकार को सुलह के विकास कार्यों को रोकने का जवाब देना ही होगा।

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