यूजीसी के मुद्दे पर बढ़ते तनाव को शांत करने हेतु स्वर्ण समाज आयोग का गठन अनिवार्य :- प्रवीन कुमार
यूजीसी के मुद्दे पर बढ़ते तनाव को शांत करने हेतु स्वर्ण समाज आयोग का गठन अनिवार्य :- प्रवीन कुमार, पूर्व विधायक
यूजीसी से जुड़े हालिया विवादों को लेकर प्रदेश में उभर रहे असंतोष पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाज सेवा में समर्पित इन्साफ संस्था के अध्यक्ष एवं पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार ने कहा कि इतिहास साक्षी है—जब भी देश में जातीय आधार पर राजनीति को हवा दी गई, उसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि अंग्रेज भले ही देश छोड़कर चले गए, परंतु विभाजन के जो बीज उस समय बोए गए, वे आज भी भारतीय समाज में समय-समय पर उगते दिखाई देते हैं। यदि शासन व्यवस्था सामाजिक संतुलन के बजाय विभाजन की रेखाओं पर आधारित प्रतीत हो, तो इससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। लोकतंत्र की मजबूती समरसता से होती है, विभाजन से नहीं।
प्रवीन कुमार ने स्मरण दिलाया कि नब्बे के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशों को लेकर जो देशभर में व्यापक सामाजिक उथल-पुथल देखने को मिली। उस दौर में उग्र आंदोलन, सामाजिक तनाव और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं ने राष्ट्र को झकझोर करके रख दिया था। समाज में विभाजन की रेखाएं गहरी हुईं और उसके प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए गए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी व्यापक सोच रखती है। शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में युवा वर्ग जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में यदि किसी भी प्रकार का सामाजिक ध्रुवीकरण पुनः उभरता है, तो यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए चिंताजनक संकेत होगा।
पूर्व विधायक ने माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जी से आग्रह किया कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग कार्यरत हैं, उसी प्रकार वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्वर्ण समाज आयोग के गठन पर भी विचार किया जाए, ताकि सभी वर्गों की भावनाओं को संवाद और संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से सकारात्मक दिशा दी जा सके।
उन्होंने प्रदेशवासियों से शांति, संयम और आपसी भाईचारे की भावना बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि समय रहते संवाद, संतुलन और समावेशी निर्णय ही सामाजिक समरसता और विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

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