हिमाचली साहित्यकार पंकज दर्शी की पुस्तक "लेखनी" के बाद अब "प्रथम पारस" प्रकाशित।

हिमाचली साहित्यकार पंकज दर्शी की पुस्तक "लेखनी" के बाद अब "प्रथम पारस" प्रकाशित।



हिमाचल के चर्चित साहित्यकारों में पंकज दर्शी की शिक्षा और साहित्य की सेवा में हिंदी में रचित और संकलित कहानी किस्सों का एक और संग्रह जुड़ा है । इस पुस्तक का नाम "प्रथम पारस" है जिसमें प्रेरणादायक, विवेक, अध्यात्म और बौद्धिकता की कुल 56 कहानी किस्से सम्मिलित हैं । पुस्तक का प्रकाशन ट्रेडीशनल पब्लिकेशन के अंतर्गत अंतराष्ट्रीय प्रकाशक इंडिया नेटबुक्स पब्लिशर ( बुद्धनगर दिल्ली एन सी आर, सैन टैन टोनियो टेक्सस अमेरिका ) द्वारा किया गया है । इसी प्रकाशक से पंकज दर्शी की यह दूसरी पुस्तक है और पहली पुस्तक "लेखनी" ने अभी तक अपनी अभिनव और दार्शनिकता के लिए हजारों पाठकों और विद्वानों की विशेष रुचि आकर्षित की है । बता दें कि छात्रों की बेहतर मनोवृति के लिए पंकज दर्शी उन्हें भाषा और साहित्य को पढ़ने जानने की सलाह देते हैं । अपने क्षेत्र में बहुत से आयोजनों के माध्यम से वे समाज में भाषा, व्यवहार, साहित्य, कला और दर्शन को लेकर गतिविधियों में जुड़े रहते हैं । हिंदी में रचित पंकज दर्शी की दूसरी पुस्तक को पहले से ही सोशल मीडिया पर प्रमोशन मिल रही है और हिमाचल बिजनेस पोर्टल के माध्यम से इसकी कहानियां लगभग प्रतिदिन प्रसारित होती हैं । प्रथम पारस में हजारों कथा किस्से जो दर्शी ने सुनें या पढ़े उनमें से केवल चुनिंदा 56 कहानी किस्सों को संकलित किया गया है । पुस्तक का आवरण विनय माथुर द्वारा बनाया गया है । प्रथम पारस की कॉग्निटिव मैथोडॉलॉजी में ज्ञान मीमांसिये दर्शन पद्धति का प्रयोग किया गया है जिसके कारण पाठक का मन सम्बलता, सकारात्मकता और सृजनात्मक मनोवृति की ओर अग्रसर होता है । जहां आज सोशल मीडिया पर बहुत से विकृत विचार और भावनाएं परोसी जा रहीं हैं वहीं ये पुस्तक पाठक की मनोवृत्ति का शुद्धिकरण करके उसे विवेकी और बौद्धिक बनाती है । पुस्तक की विशेषता यह है कि इसकी प्रत्येक कहानी कथा बहुत रोचक है और मानव को जीवन दर्शन देकर उसे जीवन के प्रति सकारात्मक बनाती है । तेनाली रामा, बीरबल, बुद्ध, संत मत और बहुत से महान व्यक्तियों के जीवन के किस्से किसी भी पाठक की रुचि को सहसा ही आकर्षित करते हैं । पाठकीय, शैक्षणिक गुण प्रधान पुस्तक को प्रत्येक पुस्तकालय में होना अनिवार्य है ताकि छात्र इनसे प्रेरणा और ज्ञान प्रकाश पाकर अपने जीवन यात्रा को सुगम करें और सफलता को पाने की ऊर्जा तथा बेहतर विकल्प जान सकें ।

पुस्तक प्रथम पारस को लेकर प्रकाशक इंडिया नेटबुक्स से सीईओ डॉ मनोरमा का कहना है कि वे पुस्तक को बुक फेयर के माध्यम से भी पाठकों तक पहुंचाने के सभी संभव कदम उठाएंगे । पुस्तक में 130 के लगभग पृष्ठ हैं और इसका संभावित मूल्य 200/ तक रहेगा, पुस्तक का आवरण मैट फिनिश पेपर बैक में उपलब्ध होगा । पुस्तक गूगल बुक स्टोर, अमेजन, फ्लिपकार्ट के माध्यम से भी ऑनलाइन खरीदी जा सकती है जिसकी जानकारी प्रकाशक जल्द उपलब्ध करवाएगा ।

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