अस्पतालों में दवा नहीं, युवाओं को रोजगार नहीं, फिर किस बात का व्यवस्था परिवर्तन? 5 लाख नौकरियाँ कहाँ गईं? 58 साल की पक्की नौकरी का क्या हुआ? मुख्यमंत्री जवाब दें : विपिन सिंह परमार
अस्पतालों में दवा नहीं, युवाओं को रोजगार नहीं, फिर किस बात का व्यवस्था परिवर्तन?
5 लाख नौकरियाँ कहाँ गईं? 58 साल की पक्की नौकरी का क्या हुआ? मुख्यमंत्री जवाब दें : विपिन सिंह परमार
पालमपुर।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आज बेरोजगारी, आर्थिक बदहाली, चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था और झूठी चुनावी गारंटियों का शिकार बन चुका है। कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले बड़े-बड़े वादे कर प्रदेश की भोली-भाली जनता को गुमराह किया, लेकिन लगभग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी एक भी प्रमुख चुनावी गारंटी धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने चुनावी सभाओं में पूरे विश्वास के साथ घोषणा की थी कि सरकार बनने के एक वर्ष के भीतर प्रदेश के युवाओं को पाँच लाख नौकरियां दी जाएंगी तथा 58 वर्ष तक की पक्की नौकरी का प्रावधान किया जाएगा। आज मैं मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सीधे सवाल पूछता हूँ कि आखिर वे पाँच लाख नौकरियाँ कहाँ हैं? 58 वर्ष की पक्की नौकरी का वादा किस फाइल में दफन हो गया? प्रदेश का युवा आज रोजगार कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर-करके निराश हो चुका है, लेकिन सरकार के पास युवाओं को देने के लिए केवल भाषण और आश्वासन हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ सबसे बड़ा छल किया है। रोजगार देने के बजाय प्रदेश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। हजारों युवा आज भी नौकरी की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन सरकार के पास कोई स्पष्ट रोजगार नीति नहीं है। मुख्यमंत्री मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर युवाओं के हाथ पूरी तरह खाली हैं।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को लगता है कि उनकी सरकार ने ऐतिहासिक कार्य किए हैं, तो वे प्रदेश की जनता के सामने अपनी सरकार की एक ऐसी उपलब्धि गिना दें, जिस पर पूरा हिमाचल गर्व कर सके। चार वर्षों में सरकार ने विकास की नई इबारत लिखने के बजाय प्रदेश को आर्थिक संकट और प्रशासनिक अव्यवस्था की ओर धकेलने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। मैं स्वयं कई सरकारी अस्पतालों का दौरा कर चुका हूँ, जहाँ मरीजों को शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी सामान्य बीमारियों की दवाइयाँ तक उपलब्ध नहीं हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं, आधुनिक मशीनें होने के बावजूद उनका संचालन करने वाला स्टाफ नहीं है और मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। आखिर यही है कांग्रेस का तथाकथित व्यवस्था परिवर्तन?
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय शुरू की गई अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को या तो बंद कर दिया गया या उन्हें कमजोर कर दिया गया। गरीबों को राहत देने वाली योजनाएँ प्रभावित हुई हैं और आम आदमी को हर मोर्चे पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनता की सेवा करने के बजाय सरकार केवल राजनीतिक प्रचार और आत्मप्रशंसा में व्यस्त दिखाई देती है।
विपिन सिंह परमार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी सामने आ रही है कि प्रदेश सरकार 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। आखिर यह सिलसिला कब रुकेगा? हिमाचल प्रदेश पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह सरकार विकास नहीं, बल्कि केवल कर्ज के सहारे चल रही है। मुख्यमंत्री को जनता को यह बताना चाहिए कि हजारों करोड़ रुपये का कर्ज आखिर कहाँ खर्च किया जा रहा है? यदि इतना पैसा लिया जा रहा है तो विकास कार्य क्यों नहीं दिखाई दे रहे? युवाओं को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा? अस्पतालों में दवाइयाँ क्यों नहीं हैं? सड़कों, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति क्यों बदतर होती जा रही है?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने की गारंटी देकर वोट माँगे थे। आज लाखों महिलाएँ अपने खाते में उस राशि के आने का इंतजार कर रही हैं। यही नहीं, कांग्रेस की अधिकांश चुनावी गारंटियाँ आज भी अधूरी हैं। जनता को अब यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि ये गारंटियाँ केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम थीं।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस सरकार की वास्तविकता को समझ चुकी है। यह सरकार विकास की नहीं, बल्कि झूठे वादों, बढ़ते कर्ज, बेरोजगारी और विफलताओं की सरकार बनकर रह गई है। मुख्यमंत्री हर समस्या का समाधान भाषणों में खोजते हैं, जबकि जनता को परिणाम चाहिए। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि सरकार के पास अपनी उपलब्धियाँ गिनाने के लिए ठोस कार्य नहीं हैं और हर असफलता का दोष दूसरों पर मढ़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जनता की आवाज़ बनकर सरकार की हर जनविरोधी नीति का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करती रहेगी। युवाओं के भविष्य, महिलाओं के सम्मान, किसानों के हित, कर्मचारियों के अधिकार और प्रदेश के विकास से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार से उसके हर झूठे वादे, हर अधूरी गारंटी और हर विफलता का हिसाब अवश्य लेगी

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