आज तक हिमाचल की कोई भी सरकार इस मंदिर को टूरिज्म के रूप में विकसित नहीं कर सकी
आज तक हिमाचल की कोई भी सरकार इस मंदिर को टूरिज्म के रूप में विकसित नहीं कर सकी
( नूरपुर:-नय महाजन)
हिमाचल प्रदेश का प्रमुख द्वारा प्राकृतिक पहाड़ियों के मनमोहक दृश्य स्वास्थ्य जल वायु से संयुक्त समुद्र तट से लगभग 2100 फुट की ऊंचाई पर नगर नूरपुर पठानकोट मंडी राष्ट्रीय उच्च मार्ग स्थित आज भी ऐतिहासिक इतिहास से जुड़ा हुआ है l इस नगर का पुराना नाम धमड़ी था l किदवंदितियों के अनुसार नूरजहां के आगमन पर इस मनमोहन क्षेत्र का नाम नूरपुर पड़ाl आज जिस स्थान पर श्री ब्रजराज स्वामी मंदिर में भगवान श्री कृष्णा मीरा के साथ विराजमान है वहां पर किसी समय राजा जगत सिंह का एक दरबार होता था l इस दरबार में बैठकर राजा अपनी अदालत लगाते थेl राजा जगत सिंह ने इस दरबार को मंदिर का रूप दिया और दीवारों पर कृष्ण लीला का चित चित्रण करवाया था l लगभग 1619 -1625 के दौरान एक बार जगत सिंह अपने पुत्र के साथ चित्तौड़गढ़ राजस्थान के राजा के आमंत्रण पर गए l राजा तथा पुरोहित को रहने के लिए जो निवास दिया गया उसी के साथ एक मंदिर था l आधी रात के समय मंदिर में घुंघरूओ की आवाजे और संगीत की धुने राजा और पुरोहित के कानों में पड़ी l राजा ने दरवाजा खोल करके दिखा एक औरत बंद कमरे में भजन गाती हुई नाच रही थी l पुरोहित तथा राजा के मन में काफी सोचने के बाद दोनों ने विचार किया कि जब यहां से जाएंगे तब राजा से उपहार में यही मूर्तियां मांगेगे l यह मूर्ति साक्षात भगवान श्री कृष्ण तथा मीरा का रूप है l राजा जगत सिंह ने ऐसा ही किया चलते वक़्त विदाई के समय उपहार में यही मूर्तियां चित्तौड़गढ़ के राजा से सम्मान पूर्वक मौलसरी एक पेड़ भेंट के रूप में मांग लिया l चित्तौड़गढ़ राजस्थान से इन मूर्तियों को राजा जगत सिंह ने नूरपुर अपने दरबार में लगाकर इसको एक भव्य मंदिर का रूप दे दिया l दोनों मूर्तियांऔर मौलसरी का वृक्ष आज भी जीता जाता एक प्रमाण है l और इस स्थल को श्री बृजराज स्वामी मंदिर के रूप में स्थापित कर दिया गया जो एक प्राचीन संस्कृत का प्रतीक है l श्री ब्रजराज स्वामी मंदिर में स्थापित श्री कृष्ण की मूर्ति काले संगमरमर की राजस्थान शैली पर बनी हुई है जो एक पैर के ऊपर टिकी है और साथ में मीराबाई की मूर्ति प्रेमवत्सल भक्ति को बताती हैl उत्तरी भारत में यह पहला मंदिर है जहां श्री कृष्ण के साथ मीराबाई एक भक्ति प्रेम दीवानी में मौजूद है जबकि अक्सर मंदिरों में श्री कृष्ण के साथ राधा की मूर्ति विराजमान है लेकिन इस तरह की मूर्ति भगवान श्री कृष्ण की कहीं भी देखने को नहीं मिलती l आजकल इस मंदिर की देखरेख काफी सालों से श्री बृजराज स्वामी कमेटी और प्रशासन के शिरकत में कार्य कर रही है जिन्होंने इस मंदिर को आज के युग में एक आधुनिक रूप डिजिटल के रूप में जोड दिया हैl काफी दूर से लोग भगवान श्री कृष्ण के भक्त इस मंदिर मे शीश निभाते है आजकल यह स्थल एक पिकनिक स्थल का रूप धारण कर चुका है l यह मंदिर भारत सरकार के पुरातत्व विभाग के किले में स्थित है l मंदिर के साथ काली माता मंदिर भी किले वाली माता के रूप में आज भी प्रसिद्ध है l यह मंदिर आज भी लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय हैकि कब मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को पुरातत्व विभाग के आदेशों से कब मुक्ति मिलेगी? हर साल राजनीतिक नेता आश्वासन देते हैं लेकिन धरातल पर परिणाम जीरो है l भाजपा सरकार में इस मंदिर को मुख्यमंत्री धूमल के कार्यकाल में पहले जिला स्तर का दर्जा पूर्व मंत्री राकेश पठानीया द्वारा दिया गया था क्योंकि उसे समय स्वर्गीय आरके महाजन में इस मंदिर में जन्माष्टमी पर्व पर लोगों के लिए एक लंगर का आयोजन किया था उसके कुछ साल बाद इस मंदिर को जिला स्तरीय मेले का दर्जा दिया गया और उसके बाद फिर जय राम की सरकार में पूर्व मंत्री राकेश पठानिया ने इसको प्रदेश स्तर का दर्जा दिलवाया था l इस मंदिर में स्वर्गीय आरके महाजन के सपनों को साकार करने के लिए उनका परिवार उनके पद चिहनों पर चलकर लोगों की सेवा में जुटकर परंपरा को कायम रखे हुए हैं l नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मंदिर को टूरिज्म के रूप में पूरी तरह विकसित किया जाए आने वाले टूरिस्टो पिकनिक का लाभ मिल सकेl भारतीय सेवा के जवान भी अपनी कंपनियों लेकर इस मंदिर में पिकनिक के रूप में आते हैंl 12 महीने मंदिर कमेटी द्वारा हर रविवार को लंगर का आयोजन बाहर से आने वाले लोगों के लिए करवाया जाता हैl आधुनिक तकनीकी के रूप में विकसित करने के लिए मंदिर कमेटी का पूरा योगदान है यह मामला अदालत में विचार दिन है मंदिर निर्णय को लेकर के

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