पूर्व पंचायत समिति सदस्य साधु राम राणा ने सरकारी नौकरियों एवं अन्य सुविधाओं में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर विभिन्न जाति संगठनों द्वारा किए जा रहे आंदोलनों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है
ज्वाली बिधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत डोल पधर के पूर्व पंचायत समिति सदस्य साधु राम राणा ने सरकारी नौकरियों एवं अन्य सुविधाओं में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर विभिन्न जाति संगठनों द्वारा किए जा रहे आंदोलनों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि आरक्षण एवं सरकारी सुविधाओं के निर्धारण में आर्थिक आधार को लागू करने की बात की जा रही है, तो इसका दायरा जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों और पेंशन तक भी होना चाहिए।
राणा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों एवं पेंशन का निर्धारण भी उनकी मौजूदा संपत्ति और अन्य आय के आधार पर करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स से प्राप्त होने वाले सरकारी धन का इस्तेमाल सुविधाओं के वितरण में पारदर्शिता और समानता के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर आम जनता को जाति एवं वर्ग के आधार पर विभिन्न सुविधाओं और आरक्षण के मापदंडों में बांटा जा रहा है, जबकि दूसरी ओर संपन्न जनप्रतिनिधियों को भी वेतन-भत्तों एवं पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।
राणा ने मांग उठाई कि जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों और पेंशन के लिए उनकी संपत्ति तथा अन्य स्रोतों से होने वाली आय को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट मापदंड तय किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति है, उन्हें सामान्य जनप्रतिनिधियों की तरह समान स्तर पर सभी आर्थिक सुविधाएं देने के बजाय संपत्ति एवं आय के आधार पर सुविधाओं का निर्धारण किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक एवं सामाजिक समानता स्थापित करने के लिए नीतियां बनाते समय सभी वर्गों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के लिए भी समान मापदंड अपनाए जाने चाहिए।
ज्वाली से राजेश कतनौरिया !

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें