नगर परिषद कार्यालय के पास दो महीने से पटाखों का कथित अवैध भंडारण, प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
नगर परिषद कार्यालय के पास दो महीने से पटाखों का कथित अवैध भंडारण, प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
घनी आबादी के बीच पटाखों का जखीरा मिलने से मचा हड़कंप, स्कूल, पेट्रोल पंप और बाजार की सुरक्षा पर उठे सवाल
24 घंटे में वैध दस्तावेज पेश करने का अल्टीमेटम, अनुमति नहीं मिलने पर गोदाम सील करने की चेतावनी
नेरचौक : अजय सूर्या /
नेरचौक में नगर परिषद कार्यालय के समीप कथित रूप से बिना वैध अनुमति पटाखों के भंडारण का मामला सामने आने से शहर में हलचल मच गई है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित गोदाम में पिछले करीब दो महीनों से पटाखों का भंडारण किए जाने की बात सामने आई है। शुक्रवार को प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कई घंटों तक जांच-पड़ताल की। इस दौरान गोदाम संचालक भंडारण से संबंधित वैध लाइसेंस और अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। प्रशासन ने संचालक को 24 घंटे के भीतर आवश्यक दस्तावेज पेश करने का अल्टीमेटम दिया है।
इस मामले ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागों की निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
न लाइसेंस पेश किया, न मिले पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम
जानकारी के अनुसार, एसडीएम के निर्देश पर शुक्रवार को तहसीलदार, पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने गोदाम में जांच की। कई घंटों तक चली छानबीन के दौरान अधिकारियों ने पटाखों के भंडारण से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन संचालक मौके पर कोई वैध अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। मौके पर अग्निशमन यंत्रों सहित आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों की कमी होने की बात भी सामने आई है।
स्कूल, पेट्रोल पंप और बाजार के बीच मंडरा रहा खतरा
गोदाम की लोकेशन ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि इसके आसपास मान्यता प्राप्त स्कूल, पेट्रोल पंप, बड़े होटल, मुख्य बाजार और घनी रिहायशी बस्ती मौजूद हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में ज्वलनशील सामग्री का असुरक्षित भंडारण किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
नगर परिषद कार्यालय के नजदीक दो महीने से भंडारण, विभागों को भनक क्यों नहीं लगी?
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित तौर पर पटाखों का भंडारण नगर परिषद कार्यालय के बिल्कुल नजदीक किया जा रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करीब दो महीने तक संबंधित विभागों की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ी? क्या किसी ने शिकायत नहीं की या फिर इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया? स्थानीय लोग अब इस संबंध में जवाब चाहते हैं।
गरीबों पर सख्ती और बड़े कारोबारियों पर नरमी के आरोप
इस मामले को लेकर स्थानीय कारोबारियों और नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे रोजी-रोटी कमाने वाले रेहड़ी-फड़ी संचालकों के खिलाफ प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन इतने संवेदनशील मामले में कार्रवाई की नौबत आने में देरी क्यों हुई? शहर में इस मामले को लेकर प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप की चर्चाएं भी हैं, हालांकि इन चर्चाओं की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
24 घंटे का अल्टीमेटम, अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत गोदाम संचालक को पटाखों के भंडारण से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में आवश्यक अनुमति पत्र पेश नहीं किए जाने की स्थिति में गोदाम को सील करने और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन निर्धारित समय सीमा के बाद क्या कदम उठाता है। नेरचौक के लोग केवल जांच और चेतावनी तक सीमित कार्रवाई नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि घनी आबादी के बीच ज्वलनशील सामग्री का असुरक्षित भंडारण किसी भी समय गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।

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