डीसी ने दिए नाहन में फरवरी तक एआरटी केन्द्र शुरू करनेे के आदेश

 डीसी ने दिए नाहन में फरवरी तक एआरटी केन्द्र शुरू करनेे के आदेश 

नशे की सिरिंज से युवाओं में बढ़ते एचआईवी मामले चिंता का विषय


नाहन  एड्स एक जानलेवा गंभीर बीमारी है जिसकी रोकथाम नितांत जरूरी है। यह बात उपायुक्त सुमित खिमटा ने जिला एड्स नियंत्रण समिति तथा क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल नाहन में फरवरी माह के अंत तक एआरटी सेंटर स्थापित होने जा रहा है जहां एड्स के मरीजों का उपचार होगा और उन्हें निःशुल्क दवाईंया मिल सकेंगी। एड्स के मरीजों को दवा व उपचार के लिये दूसरे जिलों अथवा राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। जिला में एचआईवी पॉजीटिव के लगभग 71 मामले हैं और इनकी जानकारी को गुप्त रखा जाता है।

      सुमित खिमटा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य लाइन विभागों को एचआईवी के बारे में निचले स्तर पर लोगों को जानकारी देने के लिये आई.ई.सी. तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संवेदनशील जगहों पर रोग की जानकारी व रोकथाम से संबंधित होर्डिंग लगाए जाने चाहिए। ट्रक यूनियनों, स्कूलों, औद्योगिक संस्थानों में रोग के बारे व्यापक जानकारी उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।

एचआईवी संक्रमण, उपचार व रोकथाम के बारे में चर्चा करते हुए जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी ने जानकारी सांझा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के पांचवें चरण में हैं। उन्होंने कहा कि एचआईवी एक प्रकार का वायरस है जो व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति 8 से 10 सालों में एड्स का मरीज बन जाता है जिसका कोई स्थाई उपचार नहीं है। ऐसे व्यक्ति को आजीवन दवा खानी पड़ती है।

क्या है लक्षण एचआईवी के

उन्होंने जानकारी दी कि एचआईवी के लक्षण डेढ़ महीने के बाद पता चलते हैं और कई बार सालों तक इनका पता नहीं चल पाता। व्यक्ति को बुखार, ठंड लगना, गले में खरास, मांसपेशियों में दर्द, रात को पसीना आना, थकान व गं्रथियों में सूजन जैसे लक्षण होने पर एचआईवी जांच करवाना जरूरी है।

एचआईवी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध है जो एचआईवी पॉजीटिव व्यक्ति से फैलता है। संक्रमित सिरिंज का प्रयोग भी एचआईवी का कारण बन सकता है। एचआईवी संक्रमित महिला द्वारा बच्चे को स्तनपान करवाने से बच्चे को भी यह रोग लग जाता है। इसके अलावा समलैंगिक संबंध भी एचआईवी पॉजिटिव बना सकते हैं। सबसे ज्यादा खतरा इंजेक्शन द्वारा नशा लेने वाले लोगों को है। एक ही सिरिंज का प्रयोग अनेक लोग करते हैं।

एड्स की रोकथाम के लिये क्या करें

सबसे बेहतर नुस्खा असुरक्षित यौन संबंधों से बचना है। बिना कंडोम के सेक्स खतरे से खाली नहीं है, इस बात को हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए। किसी दूसरे को प्रयोग की गई सुई का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिला संक्रमित है तो बच्चे का उपचार किया जाना चाहिए। जानकारी दी गई कि बाल चिकित्सा रोकथाम, देखभाल और उपचार कार्यक्रम का प्राथमिक लक्ष्य माता-पिता से बच्चे में संचरण की रोकथाम तथा एचआईवी से संक्रमित बचचों को उपचार और देखभाल प्रदान करना है। जिला सिरमौर में मां से बच्चे में संक्रमण का कोई भी मामला नहीं है। नाहन, पांवट ा साहिब तथा राजगढ़ अस्पतालों में एचआईवी जांच की सुविधा उपलब्ध है।

बैठक में अवगत करवाया गया कि एचआईवी पॉजीटिव लोगों का उपचार निःशुल्क किया जाता है तथा उन्हें अस्पताल आने व जाने का खर्च भी वहन सरकार द्वारा किया जाता है। यह भी स्पष्ट किया गया कि एचआईवी

छूने से एक साथ खाना खाने से, हाथ मिलाने से व साथ रहने से संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता। इसलिये समाज में एचआईवी बच्चे अथवा व्यक्ति को नकारात्मक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए और न ही उसके साथ किसी प्रकार का भेदभाव किया जाना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों के लिये मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का भी प्रावधान है।

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम समिति की एक अन्य बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने कहा कि दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी तपेदिक से संक्रमित है। हालांकि हिमाचल प्रदेश में तपेदिक रोग पर काफी सीमा तक अंकुश लगाने में हम कामयाब हुए है। समाज में अनेक लोग बीमारी से अज्ञात है और दूसरों को क्षयरोग फैलाने का काम करते हैं जिस कारण मरीजों की संख्या बढ़ने की हमेशा आशंका बनी रहती है।

   क्या है क्षयरोग और इसके लक्षण

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय पाठक ने बताया कि क्षयरोग एक जीवाणु संक्रमण है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह बीमारी खांसने, छींकने और थूकने से हवा के जरिए फैलती है। संक्रमित व्यक्तियों में 10 प्रतिशत में ही सक्रिय तपेदिक रोग विकसित होता है। उन्होंने कहा कि तपेदिक रोग उपचारशील है और इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि तपेदिक के लक्षण कई बीमारियों से मिलते जुलते हो सकते हैं। व्यक्ति में आमतौर पर श्वसन संबंधी लक्षण मौजूद होते हैं। इसके अलावा थकान, सिरदर्द, वजन घटना, बुखार आना, रात को पसीना या भूख में कमी आना इसके लक्षण हो सकते हैं। धूम्रपान क्षय रोग को विकसित करने के कारकों में सबसे अधिक संवेदनशील है। शराब का सेवन भी क्षय रोगियों के लिये मौत का कारण बन सकता है। किसी व्यक्ति को लगातार दो माह तक खांसी हो तो उसे क्षय रोग की जांच करवा लेनी चाहिए।

डॉ. पाठक ने कहा कि टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन में हिमाचल प्रदेश देश भर में अव्वल स्थान पर है। तपेदिक रोगियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर जाकर निशुल्क दवाइयां प्रदान की जा रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा दवाई स्वयं खिलाई जा रही है।

बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन शिमला के सलाहकार डॉ. महेश पुरी, डॉ अनुराग धीमान, पुलिस उप अधीक्षक रमाकांत ठाकुर, डॉ. मोनिका अग्रवाल, जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. राजन सिंह, उप निदेशक शिक्षा कर्म चंद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व केयर संस्था के निदेशक रमेश अत्री व आकांक्षा सहित अनेक लाभार्थी भी उपस्थित रहे।

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