नीम का पेड़ करता है इस ग्रह का प्रतिनिधित्व, ज्येष्ठ माह में नीम का पेड़ लगाने से अश्‍वमेघ यज्ञ का फल मिलता है

नीम का पेड़ करता है इस ग्रह का प्रतिनिधित्व, ज्येष्ठ माह में नीम का पेड़ लगाने से अश्‍वमेघ यज्ञ का फल मिलता है 


हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण नीम का पेड़ माना गया है। आयुर्वेद में भी नीम के पेड़ का खासा महत्व है। यह मंगलदेव या मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। ज्येष्ठ माह में नीम का पेड़ लगाने से अश्‍वमेघ यज्ञ का फल मिलता है और कई गुना पुण्य मिलता है  

1. नीम की दातुन करते रहने से शनि और मंगल के दोष दूर होते हैं। नीम की दातुन करते रहने से दांत के बैक्टीरिया मर जाते हैं। अर्थात दांत और मसूड़ों में किसी भी प्रकार के कीड़े नहीं रहते हैं। दांतों का कोई रोग नहीं होता है। नीम की दातुन करते रहने से सिर्फ दांत या मसूड़े ही नहीं आंखें, कान और मस्तिष्क भी सही रहते हैं। नियमित रूप से नीम का दातुन करने से चेहरे का तेज बढता हैं।


2. देवी और शक्ति की उपासना में नीम का प्रयोग किया जाता है। नीम की लकड़ी से हवन करने से शनि की शांति होती है।


3. नीम के पत्तों को जल में डालकर स्नान करने से केतु संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। 


4. नीम की लड़की के बने पलंग पर सोने से त्वचा रोग दूर होते हैं।  


5. नीम के तेल और छाल के प्रयोग से कुष्ठ रोग दूर होता है। 


6. नीम की लड़की की माला धारण करने से शनि की पीड़ा समाप्त हो जाती है। 


7. नीम के पत्तों का वन्दनवार लगाने से घर में नकारात्मक उर्जा प्रवेश नहीं करती है।


8. यदि आपका जन्म उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है या आपकी राशि मकर या कुंभ राशि है तो नीम का पेड़ लगाने बहुत ही शुभफलदायी होगा।


9. आप अपने घर की दक्षिण दिशा में नीम का एक पेड़ लगाएं और उसकी देखरेख करें। यह पेड़ साक्षात मंगलदेव हैं। इस पेड़ की सेवा करने से आपके जीवन में कभी भी अमंगल नहीं होगा।


10. जिस व्यक्ति को संकटों से मुक्ति पाना हो उसे घर के दक्षिण में नीम का वृक्ष लगाना चाहिए। 


11. नीम के वृक्ष को वायव्य कोण में लगाना भी अत्यंत शुभ फलदायी होता है। इससे धन और शत्रु संबंधी समस्या का निवारण होता है।


12. ज्योतिष में कहीं कहीं नीम का संबंध शनि और कहीं कहीं केतु से जोड़ा गया है। इसलिए दोनों ही ग्रहों की शांति हेतु उचित दिशा में नीम का पेड़ लगाया जा सकता है।


13. मंगलवार को नीम के पेड़ में शाम को जल चढ़ाएं और चमेली के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार करें। इससे हनुमानजी की कृपा प्राप्त होगी। घर के पास नीम का पेड़ लगाने और नित्य इसमें जल अर्पित करने से हनुमानजी की भी कृपा बनी रहती है।


14. हाल ही में हुए शोधों से पता चला है कि नीम के नीचे प्रतिदिन आधा घंटा बैठने से किसी भी प्रकार का चर्म रोग नहीं होता। तुलसी और नीम के पत्ते खाने से किसी भी प्रकार का कैंसर नहीं होता।

 15. नीम के सूखे पत्तों को गेहूं में डालने से की वर्षो तक गेहूं को कीड़ा नहीं लगता।

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