पौंग झील क्षेत्र में अवैध शिकार के कारण विदेशी पक्षी शिकार बन रहे है शिकारियो के
पौंग झील क्षेत्र में अवैध शिकार के कारण विदेशी पक्षी शिकार बन रहे है शिकारियो के
नूरपुर
नूरपुर पौंग झील में प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन्य प्राणी विभाग दावे तो बड़े-बड़े करता आया है लेकिन झील के किनारे खाली भूमि पर अलग-अलग जगह पर पक्षियों के अबशेषओ का मिलना क्षेत्र में अवैध शिकार की तरफ इशारा कर रहा हैl पंजाब हिमाचल की सीमा से सटा हिमाचल में पोंग बांध की झील इस क्षेत्र मे आज भी पर्यटन के नजरिये से एक महत्वपूर्ण पर्यटकों के लिऐ टूरिस्ट प्लेस है l पोंग झील क्षेत्र के किनारे पक्षियों के पंख अवशेषों का मिलना क्षेत्र में चर्चा का विषय है क्या संबंधित विभाग इस क्षेत्र में अवैध शिकार पर लगाम लगा पायेगा? ऐसे अनेको प्रश्न पर्यावरण विद्द व क्षेत्र की जनता की जुबान पर चर्चित हैंl सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि क्षेत्र में विभाग की सबसे बड़ी समस्या स्टाफ का अभाव होना पाया गया हैजिस कारण इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाना मुश्किल दिखाई दे रहा हैl ऐसा लगता है कि विभाग अभी तक धरातल पर इसका सर्वे भी नहीं कर सका l उल्लेखनीय है कि लगभग 100 प्रजातियों के विदेशी पक्षी एक लाख की संख्या मे आने की संभावनाएं इन सर्दियों में झील में आने की है l इनकी सुरक्षा के लिए वन्य प्राणी विभाग टीमें गठित करके इनको सुरक्षा प्रदान के दावे कर रहा है लेकिन इस तरह से पक्षियों के पंखो का मिलना अबैध शिकार की तरफ़ इशारा भी करता है l सर्दियों के मौसम में कई विदेशी पंछी इस झील के किनारे आते हैं और माइग्रेशन के साथ एक ही लाइन में उड़ान भरकर अपने देश को वापस हो जाते हैं इनमें कितने अवैध शिकार होकर अपनी जान दे देते हैं इसकी कोई जानकारी नहींl ऐसी चर्चा क्षेत्र में जनता की जुबान पर चर्चित हैं चाहे हिमाचल में किसी भी सियासी दल की सरकार हो इन बेज़ुबान परिंदों का अवैध शिकार जारी रहेगा l क्षेत्र वासियों व सामाजिक संस्थाओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि विधानसभा में सरकार इस विषय में सख्त कदम उठाए l लोगों का यह भी कहना है कि आखिरकार प्रतिपक्ष नेता जयराम ठाकुर विधानसभा में इस मामले में क्यों नहीं बात करते हैं जबकि वह प्रदेश में 5 साल मुख्यमंत्री रह चुके हैं l प्रदेश के कुछ भाजपा नेताओं ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री के भोज में जंगली मुर्गे के परोसे पर काफ़ी राजनीती की थी अवश्य लेकिन इन बेजुबान परिंदों के अवैध शिकार पर अंकुश लगाने का कोई भी प्रस्ताव अभी तक विधानसभा में नहीं रखा l इस मामले में प्रदेश के संबंधित विभागीय अधिकारी का कहना है कि विभाग द्वारा समय-समय पर इस बात पर निगरानी रखी जाती है क्योंकि यह क्षेत्र काफी संवेदनशील हैl विभाग का यह भी कहना है कि अगर सामाजिक संस्थाएं इस मामले में सहयोग करें तो इस प्रकार अवैध शिकार पर अंकुश लग सकता है इसलिए जनता का सहयोग बहुत जरूरी हैl

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