बीपीएल सूची में पात्र परिवारों को जोड़ने और अपात्रों को हटाने की कवायद तेज
बीपीएल सूची में पात्र परिवारों को जोड़ने और अपात्रों को हटाने की कवायद तेज
नूरपुर : विनय महाजन /
मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत बीपीएल यानी पात्र परिवारों के चयन और सूची के सत्यापन की प्रक्रिया प्रशासन ने तेज कर दी है। इसी कड़ी में एसडीएम इंदौरा डॉ. सुरेंद्र ठाकुर की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न पंचायतों के प्रधानों और पंचायत सचिवों ने भाग लिया। बैठक में पात्र परिवारों के चयन, सूची के सत्यापन तथा सरकार द्वारा निर्धारित समावेशन और बहिष्करण मानदंडों पर विस्तार से चर्चा की गई।
एसडीएम ने बताया कि अब तक आठ चरणों में 1334 लोग पात्र पाए गए हैं, जबकि नौवें चरण में सूची का बारीकी से सत्यापन किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित मापदंड पूरा करने वाला कोई भी परिवार सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और अपात्र परिवार योजना का लाभ न ले सके।
पात्रता की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें पटवारी, पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल होंगे। कमेटी संबंधित परिवार की वास्तविक स्थिति की जांच कर यह सुनिश्चित करेगी कि वह सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार पात्र है या नहीं।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि कोई परिवार निर्धारित समावेशन मानदंडों में से एक या अधिक को पूरा करता है तो उसे पात्रता के लिए चिन्हित किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम पात्रता तय करने से पहले बहिष्करण मानदंडों की भी जांच की जाएगी।
सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चों वाले परिवार, अथवा ऐसे परिवार जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन हों और 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य न हो, निर्धारित शर्तों के तहत पात्रता के दायरे में आ सकते हैं। इसके अलावा महिला मुखिया वाले ऐसे परिवार, जिनमें 27 से 59 वर्ष की महिला विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा या परित्यक्ता हो, भी निर्धारित शर्तों के अनुसार पात्र हो सकते हैं।
इसी प्रकार ऐसे परिवार जिनके मुखिया को 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता हो, जिनके किसी वयस्क सदस्य ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कम से कम एक दिन काम किया हो, अथवा जिनके कमाने वाले सदस्य गंभीर बीमारी या दुर्घटना के कारण स्थायी रूप से अक्षम या बिस्तर पर हों, भी निर्धारित मानदंडों के तहत पात्र हो सकते हैं। भूमिहीन परिवारों को भी समावेशन मानदंडों में रखा गया है।
इन परिवारों को किया जाएगा बाहर
प्रशासन के अनुसार जिन परिवारों का कोई सदस्य आयकरदाता है, जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक है, जिनके पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है अथवा जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी, अर्द्धसरकारी या निजी सेवा में है, उन्हें बहिष्करण मानदंड के तहत योजना से बाहर रखा जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि केवल किसी एक समावेशन मानदंड को पूरा करना अंतिम पात्रता नहीं माना जाएगा। पहले परिवार को पात्रता के लिए चिन्हित किया जाएगा और इसके बाद उस पर बहिष्करण मानदंड लागू किए जाएंगे। यदि परिवार बहिष्करण की किसी भी शर्त में नहीं आता है, तभी उसे अंतिम रूप से पात्र माना जाएगा।
एसडीएम डॉ. सुरेंद्र ठाकुर ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि नौवें चरण में सत्यापन का कार्य पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किया जाए। यदि कोई व्यक्ति या परिवार पात्र है और पिछली प्रक्रिया में किसी कारणवश सूची में शामिल होने से छूट गया है तो उसे नियमानुसार सूची में जोड़ा जाए। वहीं, वर्तमान सूची में यदि कोई अपात्र व्यक्ति शामिल है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। पंचायत स्तर पर होने वाला सत्यापन निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए, ताकि न कोई पात्र परिवार लाभ से वंचित रहे और न ही कोई अपात्र व्यक्ति सरकारी योजना का लाभ उठा सके।

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