जन्माष्टमी में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, नूरपुर में गरमाई सियासत
जन्माष्टमी में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, नूरपुर में गरमाई सियासत
जन्माष्टमी के बहाने नूरपुर भाजपा में शक्ति प्रदर्शन, अलग-अलग गुटों की सक्रियता से गरमाई सियासत
नूरपुर : विनय महाजन /
सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, विधायक रणवीर सिंह निक्का और पूर्व मंत्री राकेश पठानिया अलग-अलग समर्थक समूहों के साथ पहुंचे श्री बृजराज स्वामी मंदिर, समर्थकों की भीड़ और नारों ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं
प्रदेश स्तरीय जन्माष्टमी महोत्सव के अवसर पर नूरपुर में धार्मिक आस्था के साथ-साथ भाजपा की अंदरूनी राजनीति भी चर्चा का विषय बन गई। श्री बृजराज स्वामी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने के लिए भाजपा के प्रमुख नेताओं का अलग-अलग समर्थक समूहों के साथ पहुंचना क्षेत्र की राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना रहा। एक ओर कांगड़ा-चंबा लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और भाजपा विधायक रणवीर सिंह निक्का अपने समर्थकों के साथ मंदिर पहुंचे, वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री राकेश पठानिया भी अलग बड़े समूह के साथ जुलूस की शक्ल में मंदिर पहुंचे। नेताओं के अलग-अलग समूहों में पहुंचने और समर्थकों द्वारा अपनी-अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने को नूरपुर भाजपा में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
जन्माष्टमी के दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय महोत्सव के प्रथम दिन नूरपुर में सुबह से ही श्री बृजराज स्वामी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचे। इसी बीच भाजपा के नेताओं और उनके समर्थकों के अलग-अलग समूहों में मंदिर पहुंचने से धार्मिक आयोजन के बीच राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली।
अलग-अलग समूहों में पहुंचे भाजपा नेता
कांगड़ा-चंबा लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और भाजपा विधायक रणवीर सिंह निक्का अपने-अपने समर्थकों के साथ नूरपुर पहुंचे। नगर परिषद के नियाजपुर बस स्टैंड के पास भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद समर्थकों के साथ जुलूस की शक्ल में मंदिर की ओर रवाना हुए और श्री बृजराज स्वामी मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष शीश नवाया।
इस दौरान समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला। नेताओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं दीं।
वहीं, भाजपा के पूर्व मंत्री राकेश पठानिया भी अपने समर्थकों के बड़े समूह के साथ श्री बृजराज स्वामी मंदिर पहुंचे। उनके समर्थक भी जुलूस के रूप में मंदिर पहुंचे। इस दौरान समर्थकों द्वारा राकेश पठानिया के समर्थन में नारे लगाए जाने की चर्चा रही। खास बात यह रही कि इस जुलूस में महिलाओं की भागीदारी भी काफी संख्या में दिखाई दी।
एक ही पार्टी, लेकिन अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन!
नूरपुर में भाजपा के इन नेताओं की अलग-अलग मौजूदगी ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही पार्टी के प्रमुख नेता जब एक ही धार्मिक आयोजन में अलग-अलग समर्थक समूहों के साथ पहुंचें और उनकी मौजूदगी अलग-अलग दिखाई दे, तो इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं होना स्वाभाविक है।
स्थानीय स्तर पर इसे नूरपुर भाजपा के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान और भविष्य के नेतृत्व को लेकर संभावित शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि नेताओं की ओर से इसे लेकर कोई खुला राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन समर्थकों की संख्या, जुलूस और अलग-अलग नारेबाजी ने चर्चाओं को जरूर हवा दी है।
राजनीतिक जानकारों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जन्माष्टमी के इस धार्मिक आयोजन के दौरान दिखाई गई अलग-अलग सक्रियता महज धार्मिक आस्था थी या इसके माध्यम से नूरपुर भाजपा के भीतर अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का संदेश देने का प्रयास भी किया गया?
श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच आम लोगों को हुई परेशानी
श्री बृजराज स्वामी मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। कई श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। मंदिर में अत्यधिक भीड़ होने के कारण कुछ लोगों के बिना दर्शन किए लौटने की बात भी सामने आई।
कुछ श्रद्धालुओं और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने सवाल उठाया कि जब आम श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़ा होना पड़ा, ऐसे में बड़े राजनीतिक समूहों के जुलूस के रूप में मंदिर पहुंचने से व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
लोगों का कहना था कि जन्माष्टमी धार्मिक आस्था का पर्व है और इस दिन मंदिर में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को समान रूप से दर्शन का अवसर मिलना चाहिए। अत्यधिक भीड़ के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कुछ श्रद्धालुओं का यह भी कहना था कि राजनीतिक नेताओं और उनके समर्थकों के बड़े समूहों के कारण सामान्य श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में और अधिक समय लगा।
स्वर्गीय आरके महाजन परिवार के योगदान की भी चर्चा
स्थानीय लोगों का कहना है कि नूरपुर के श्री बृजराज स्वामी मंदिर में आयोजित होने वाले जन्माष्टमी महोत्सव को प्रदेश स्तरीय पहचान मिलने के पीछे लंबे समय से अनेक लोगों और संस्थाओं का योगदान रहा है। लोगों ने विशेष रूप से स्वर्गीय आरके महाजन परिवार के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस आयोजन की नींव वर्षों पहले रखी गई थी, वह आज प्रदेश स्तरीय महोत्सव का रूप ले चुका है।
लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन किसी एक राजनीतिक दल या नेता का नहीं, बल्कि पूरे नूरपुर क्षेत्र की आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और श्रद्धा का पर्व है, तो इस अवसर पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
जनता की जुबान पर कई सवाल
नूरपुर में जन्माष्टमी के दौरान भाजपा नेताओं की अलग-अलग सक्रियता को लेकर अब स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि यदि सभी नेता एक ही राजनीतिक दल से जुड़े हैं तो धार्मिक आयोजन में अलग-अलग समूहों में शक्ति प्रदर्शन जैसी स्थिति क्यों बनी?
क्या यह केवल समर्थकों की स्वाभाविक मौजूदगी थी या फिर इसके पीछे आने वाले समय की राजनीति का कोई संदेश भी था? क्या नूरपुर भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान बढ़ रही है? क्या अलग-अलग नेताओं के समर्थक अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव का प्रदर्शन करना चाहते हैं?
इन सवालों का जवाब तो भाजपा के नेता ही दे सकते हैं, लेकिन जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान दिखाई दिए अलग-अलग समूहों ने नूरपुर की सियासत को जरूर गर्म कर दिया है।
धार्मिक मंच पर दिखी राजनीतिक हलचल बनी चर्चा का विषय
जन्माष्टमी का यह आयोजन जहां हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र रहा, वहीं भाजपा नेताओं की अलग-अलग मौजूदगी ने इसे राजनीतिक चर्चाओं का विषय भी बना दिया। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच अलग-अलग नेताओं के समर्थक समूहों की मौजूदगी और नारेबाजी ने नूरपुर भाजपा के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या भाजपा के भीतर अलग-अलग धड़े अपने-अपने प्रभाव का आकलन कर रहे हैं और क्या आने वाले समय में इसका असर नूरपुर की राजनीति पर दिखाई देगा।
एक तरफ प्रदेश स्तरीय जन्माष्टमी महोत्सव ने नूरपुर को धार्मिक आस्था के बड़े केंद्र के रूप में पहचान दिलाई, वहीं इसी आयोजन के दौरान भाजपा नेताओं की अलग-अलग मौजूदगी ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को भी सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। धार्मिक आयोजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच भाजपा के अलग-अलग समूहों का शक्ति प्रदर्शन आखिर क्या संदेश दे रहा है—यह सवाल फिलहाल नूरपुर की सियासी गलियों में सबसे ज्यादा चर्चा में है।

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