बसंत पंचमी पर यह 5 घंटे और 20 मिन्ट आपके जीवन में नई ऊर्जा का संचार, सरस्वती पूजा का मुहूर्त? - Smachar

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बसंत पंचमी पर यह 5 घंटे और 20 मिन्ट आपके जीवन में नई ऊर्जा का संचार, सरस्वती पूजा का मुहूर्त?

बसंत पंचमी पर यह 5 घंटे और 20 मिन्ट आपके जीवन में नई ऊर्जा का संचार, सरस्वती पूजा का मुहूर्त?

सरस्वती पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। धूप, दीप और गुग्गुल जलाकर पूजा का आरंभ करें। सबसे पहले गणपति जी की पूजा करना अनिवार्य माना जाता है, ताकि पूजा में कोई बाधा न आए।

इसके बाद माता सरस्वती का ध्यान करें और शुद्ध आसन पर बैठकर पूजा करें। गणेश पूजन के बाद ही कलश स्थापना की जाती है। कलश में सुपारी, अक्षत, दूर्वा और मुद्रा रखी जाती है। कलश पर नारियल और वस्त्र रखा जाता है। इसके बाद वरुण देव का स्मरण करते हुए कलश पूजन किया जाता है। इसके पश्चात मां सरस्वती का ध्यान कर उनका आह्वान किया जाता है और उन्हें स्नान, वस्त्र, चंदन, पुष्प और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।

सरस्वती पूजा के दौरान किताबें, कॉपी, पेन और वाद्य यंत्र माता के पास रखें। मान्यता है कि इन वस्तुओं पर फूल और अक्षत अर्पित करने से पढ़ाई और कला में सफलता मिलती है। पूजा के बाद इन्हीं वस्तुओं से पढ़ाई या अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग इस दिन विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा करते हैं, उन्हें ज्ञान, बुद्धि और वाणी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

खासतौर पर स्टूडेंट्स के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 23 जनवरी यानी आज के दिन मनाया जा रहा है। मान्यता है कि बसंत पंचमी से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है और प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं कि इस दिन पूजा मुहूर्त क्या है?

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