झूठ, गुटबाजी और अफसरशाही के कब्ज़े में हिमाचल—मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी तरह दिशाहीन और विफल - Smachar

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झूठ, गुटबाजी और अफसरशाही के कब्ज़े में हिमाचल—मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी तरह दिशाहीन और विफल

झूठ, गुटबाजी और अफसरशाही के कब्ज़े में हिमाचल—मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पूरी तरह दिशाहीन और विफल


पालमपुर

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री  सुखविंदर सिंह सुक्खू आज प्रदेश की जनता के साथ सुनियोजित ढंग से झूठ बोल रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री पद जैसी संवैधानिक और गरिमामयी जिम्मेदारी पर बैठा व्यक्ति भी अब न तो अपने शब्दों की मर्यादा रख पा रहा है और न ही जनता के प्रति जवाबदेही निभा रहा है। भरे मंचों से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और गरीब कल्याण को लेकर जो ऊंचे-ऊंचे दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह खोखले हैं और उनका धरातल से कोई लेना-देना नहीं है।

मुख्यमंत्री के भाषणों और ज़मीनी सच्चाई के बीच इतना बड़ा अंतर शायद हिमाचल के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। शिक्षा के “सुदृढ़करण” और स्वास्थ्य को “देश का नंबर-वन” बनाने की बातें केवल भाषणों और विज्ञापनों तक सीमित हैं। वास्तविकता यह है कि स्कूल बंद किए जा रहे हैं, शिक्षकों की भारी कमी है, अस्पताल बदहाल हैं, डॉक्टर और दवाइयाँ उपलब्ध नहीं हैं और गरीब व मध्यम वर्ग इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। यह विकास नहीं, बल्कि जनता के साथ किया जा रहा एक भद्दा और अमानवीय मजाक है।

भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाएं—जिनसे गरीब, मजदूर, किसान और जरूरतमंद वर्ग को सीधा लाभ मिल रहा था—कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही या तो बंद कर दीं या जानबूझकर निष्क्रिय बना दिया। आयुष्मान भारत, हिमकेयर जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं को कमजोर कर गरीबों से उनका अधिकार छीना गया। पहले जहां लोगों को अपने ही क्षेत्र में इलाज मिल जाता था, आज उन्हें मजबूरन बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

रोजगार के मोर्चे पर कांग्रेस सरकार की विफलता ऐतिहासिक है। चुनाव से पहले लाखों नौकरियां देने का वादा किया गया था। युवाओं को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन आज तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी बेरोजगारी चरम सीमा पर है। प्रतियोगी परीक्षाएं समय पर नहीं हो रहीं, उनके परिणाम लटकाए जा रहे हैं और प्रदेश का नौजवान हताश और निराश होकर अपने भविष्य को लेकर चिंता में डूबा हुआ है। यह युवाओं के साथ किया गया सबसे बड़ा धोखा है।

प्रदेश कांग्रेस की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और शर्मनाक हो चुकी है। आपसी गुटबाजी इस कदर हावी हो चुकी है कि सरकार और संगठन दोनों पंगु होते नजर आ रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि हाल ही में भरे मंच पर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में ही दो बड़े कांग्रेसी नेता आपस में उलझ पड़े। यह घटना साफ दिखाती है कि कांग्रेस पार्टी अब अनुशासन, नेतृत्व और दिशा—तीनों ही खो चुकी है।

आज प्रदेश की कांग्रेस सरकार कई गुटों में बंट चुकी है। न मंत्रियों में आपसी समन्वय है और न ही संगठन व सरकार के बीच कोई तालमेल। हर मंत्री और नेता अपनी अलग-अलग राजनीति और एजेंडा चला रहा है। ऐसी सरकार प्रदेश को क्या दिशा देगी—यह सवाल आज हर हिमाचलवासी के मन में है।

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि स्वयं एक कैबिनेट मंत्री ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि प्रदेश सरकार पर अफसरशाही पूरी तरह हावी हो चुकी है। यह स्वीकारोक्ति अपने आप में सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इसका सीधा अर्थ यह है कि नीतियां चुनी हुई सरकार नहीं, बल्कि अफसर तय कर रहे हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच कोई समन्वय नहीं है, निर्णय प्रक्रिया भ्रमित है और शासन पूरी तरह दिशाहीन हो चुका है।

केंद्र सरकार को लेकर भी कांग्रेस सरकार का दोहरा और भ्रमित चरित्र उजागर हो चुका है। मुख्यमंत्री हर मंच से यह रोना रोते हैं कि केंद्र सरकार हिमाचल की कोई मदद नहीं कर रही। लेकिन दूसरी ओर, उनकी ही कैबिनेट के एक मंत्री अखबारों, सोशल मीडिया और बड़े मंचों से केंद्र सरकार का खुलेआम धन्यवाद करते दिखते हैं। वे कहते हैं कि जब वे केंद्र सरकार के पास गए, तो केंद्र सरकार ने उन्हें पूरा सहयोग दिया और प्रदेश के हित में सहायता प्रदान की। यह कैसी सरकार है, जहां मुख्यमंत्री और उनके मंत्री एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत बयान दे रहे हैं?

यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि इस सरकार में न नीति है, न नेतृत्व और न ही कोई स्पष्ट दिशा। मुख्यमंत्री अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हैं, जबकि उनके ही मंत्री उन आरोपों की पोल खोलते नजर आते हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू केवल झूठे वादों के सहारे सत्ता में आए हैं। जनता को गुमराह कर विश्वास हासिल किया गया, लेकिन आज तीन वर्ष बाद भी धरातल पर कोई ठोस उपलब्धि दिखाई नहीं देती। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास—हर मोर्चे पर सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है।

कांग्रेसी नेता न तो जनता के काम करवा पा रहे हैं और न ही अपनी सरकार की कोई उपलब्धि गिना पा रहे हैं। और गिनाएं भी कैसे—जब किया ही कुछ नहीं। पूरी सरकार बयानबाजी, दोषारोपण, आपसी कलह और गुटबाजी में उलझी हुई है।

भारतीय जनता पार्टी इस जनविरोधी, दिशाहीन और झूठ पर आधारित सरकार को लगातार बेनकाब करती रहेगी। हम हिमाचल की जनता के साथ खड़े हैं और उनके अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक पूरी मजबूती से लड़ेंगे। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे मंचों से झूठ बोलना बंद करें, अफसरशाही के सामने घुटने टेकने के बजाय नेतृत्व दिखाएं और प्रदेश की जनता से अपनी विफलताओं के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

हिमाचल की जनता सब देख रही है, सब समझ रही है। समय आने पर यह जनता लोकतांत्रिक तरीके से इस विफल, गुटबाजी में डूबी और भ्रम की सरकार को करारा जवाब देगी।

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