सामुदायिक प्रेरकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न
सामुदायिक प्रेरकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न
पालमपुर
हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना (एचपीसीडीपी) फेज-II के अंतर्गत सामुदायिक प्रेरकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में हुआ। यह शिविर 28 से 30 अगस्त तक चला, जिसमें जिला कांगड़ा की विभिन्न उप-परियोजनाओं से आए 30 सामुदायिक प्रेरकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रेरकों को आधुनिक सिंचाई प्रबंधन, जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने संबंधी नवीनतम तकनीकों की जानकारी देना रहा।
पहले दिन का प्रशिक्षण
प्रथम दिवस में डॉ. लव भूषण ने “सिंचाई प्रबंधन का महत्व, क्षेत्रीय जल स्रोत, फसलों की नाजुक अवस्थाएँ तथा सिंचाई निर्धारण” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि समय पर और उचित मात्रा में की गई सिंचाई से फसलों की उत्पादकता के साथ-साथ गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है।
दूसरे दिन का प्रशिक्षण
दूसरे दिन प्रतिभागियों को आधुनिक सिंचाई प्रणालियों—सतही सिंचाई, स्प्रिंकलर, ड्रिप और माइक्रो-इरिगेशन—से परिचित कराया गया। प्रशिक्षकों ने जल संरक्षण की उन्नत तकनीकों, सिंचाई योजनाओं के संचालन व रख-रखाव के व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए।
तीसरे दिन का प्रशिक्षण
अंतिम दिवस पर डॉ. पी.एल. शर्मा (सेवानिवृत्त जिला परियोजना प्रबंधक) ने प्रेरकों की भूमिकाओं और सहभागी सिंचाई प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रेरक किसानों को समूह आधारित सिंचाई प्रबंधन के लिए प्रेरित कर सकते हैं और जल संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए उनकी जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
समापन सत्र
समापन अवसर पर डॉ. योगेन्द्र पॉल कौशल, जिला परियोजना प्रबंधक पालमपुर, ने कहा कि यह प्रशिक्षण सामुदायिक प्रेरकों के क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षित प्रेरक अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
इस अवसर पर डॉ. जीडी शर्मा (निदेशक विस्तार), डॉ. संजीव संदल (वैज्ञानिक), डॉ. अमित भूषण (बीपीएम पालमपुर) और श्री निकेत (विपणन अधिकारी) ने भी प्रतिभागियों के साथ अपने विचार साझा किए और उन्हें व्यावहारिक ज्ञान से अवगत कराया।
इस प्रकार तीन दिवसीय शिविर ने सामुदायिक प्रेरकों को सिंचाई प्रबंधन और कृषि विविधिकरण के क्षेत्र में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।
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