पालमपुर के विकास की दिशा में इन्साफ संस्था का प्रयास - Smachar

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पालमपुर के विकास की दिशा में इन्साफ संस्था का प्रयास

 पालमपुर के विकास की दिशा में इन्साफ संस्था का प्रयास

न्यूगल धौलाधार हाइड्रो टूरिज़्म परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को प्रेषित


पालमपुर

समाज सेवा में निरंतर सक्रिय इन्साफ संस्था ने पालमपुर को विकास की नई राह देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्री व निवर्तमान केंद्रीय मंत्री श्री शान्ता कुमार के माध्यम से केंद्रीय ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर को न्यूगल धौलाधार हाइड्रो टूरिज़्म परियोजना पर तैयार की गई पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट प्रेषित की है।


यह रिपोर्ट संस्था के अध्यक्ष एवं पालमपुर के पूर्व विधायक प्रवीन कुमार की मौजूदगी में संस्था की तकनीकी टीम—विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त निदेशक इंजीनियर पवन कोहली, इंजीनियर जी.सी. भट्ट और इंजीनियर एस.सी. घारिया द्वारा तैयार की गई है।



न्यूगल खड्ड के दाहिने तट पर बहुआयामी परियोजना की परिकल्पना


संस्था ने इस रिपोर्ट में पालमपुर शहर से सटे न्यूगल खड्ड (व्यास नदी की सहायक धारा) के दाहिने तट पर जल-सौर ऊर्जा, पर्यटन और वन्य जीवन आधारित एक बहुआयामी परियोजना का खाका तैयार किया है।

इस परियोजना में शामिल हैं –


लघु जल विद्युत परियोजनाएँ (13.6 मेगावाट क्षमता तक)


सौर ऊर्जा संयंत्र (2.5–3 मेगावाट तक)


झीलें और तैरते सौर पैनल


मत्स्य पालन का विकास


प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास


साहसिक खेल और ट्रैकिंग मार्ग


वन्य जीवन केंद्र और हेरिटेज विलेज (कांगड़ा विरासत गांव)



प्रस्तावित झीलें न केवल ऊर्जा उत्पादन और पर्यटन को बढ़ावा देंगी, बल्कि मत्स्य पालन और प्रवासी पक्षियों के लिए भी वरदान सिद्ध होंगी।



पर्यटन व स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा


संस्था के अध्यक्ष प्रवीन कुमार ने बताया कि फिलहाल पालमपुर में पर्यटन के लिए कोई बड़ा आकर्षण केंद्र मौजूद नहीं है। जबकि यहाँ के पास पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन और होटल व आवास सुविधाएँ हैं, जिनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा।

इस परियोजना से—


पर्यटन को नया आयाम मिलेगा


स्वरोज़गार और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे


ऊर्जा उत्पादन से क्षेत्रीय विकास होगा


स्थानीय संस्कृति और विरासत को पहचान मिलेगी


उन्होंने कहा कि पालमपुर, जो धौलाधार पर्वतमाला की तलहटी में बसा है, पहले से ही अपनी चाय बागानों, देवदार–चीड़ के जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह परियोजना यहाँ आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के ठहरने का समय बढ़ाएगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगी।


केंद्र सरकार से अनुमोदन और वित्तीय सहयोग की अपेक्षा


प्रवीन कुमार ने जानकारी दी कि यह रिपोर्ट केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के विचारार्थ और प्रशासनिक अनुमोदन हेतु प्रस्तुत की जा रही है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश सरकार से मॉडल अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है।

इसके लिए रिपोर्ट को केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र, पुणे जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी संदर्भित किया जा सकता है।


उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि केंद्र सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करे तो यह परियोजना पालमपुर में पर्यटन,

 ऊर्जा और स्वरोज़गार के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगी।


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