सांबा में पत्रकार पर हमला, खून से लथपथ सड़क पर तड़पता रहा पत्रकार – सुरक्षा पर उठे सवाल - Smachar

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सांबा में पत्रकार पर हमला, खून से लथपथ सड़क पर तड़पता रहा पत्रकार – सुरक्षा पर उठे सवाल

 सांबा में पत्रकार पर हमला, खून से लथपथ सड़क पर तड़पता रहा पत्रकार – सुरक्षा पर उठे सवाल


सांबा (जम्मू-कश्मीर)

सांबा ज़िले के सुम्ब गांव में शनिवार देर शाम एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। स्थानीय पत्रकार पंकज शर्मा पर कुछ अज्ञात युवकों ने हमला कर दिया। हमला इतना भीषण था कि पत्रकार लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा और मदद की गुहार लगाता रहा।


खून से लथपथ हालत में मदद को तरसा


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पंकज शर्मा को बेरहमी से पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वह खून से लथपथ हालत में आसपास के लोगों से मदद की अपील करता रहा, लेकिन अफसोस की बात यह रही कि मौके पर मौजूद किसी ने उसकी मदद करने की हिम्मत नहीं दिखाई। इस बीच, स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद घायल पत्रकार को अस्पताल पहुंचाया गया।


पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल


यह घटना न केवल एक पत्रकार पर हमला है, बल्कि समाज की उस आवाज़ पर हमला है जो सच बोलती और सच दिखाती है। पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन यदि वही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।


प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग


स्थानीय पत्रकार संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि पत्रकारों पर हमले किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला हैं।

उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि हमलावरों को किसी भी हाल में बख्शा न जाए और इस मामले में त्वरित जांच कर दोषियों को कठोर सज़ा दी जाए।


पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंत


पत्रकारों का कहना है कि अगर सच्चाई सामने लाने वाले लोग ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम जनता की आवाज़ कौन उठाएगा। उन्होंने प्रशासन से पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।


समाज की ज़िम्मेदारी


घटना ने यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर क्यों खून से लथपथ मदद मांगते पत्रकार की किसी ने सहायता नहीं की। क्या हम संवेदनहीन होते जा रहे हैं? यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों में चुप न रहा जाए और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए आवाज़ बुलंद की जाए।

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