जोगिंद्रनगर कॉलेज में उन्नत भारत अभियान के तहत भव्य मेला, स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति की झलक बनी आकर्षण - Smachar

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जोगिंद्रनगर कॉलेज में उन्नत भारत अभियान के तहत भव्य मेला, स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति की झलक बनी आकर्षण

 जोगिंद्रनगर कॉलेज में उन्नत भारत अभियान के तहत भव्य मेला, स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति की झलक बनी आकर्षण


जोगिंद्रनगर

राजीव गांधी स्मारक राजकीय महाविद्यालय, जोगिंद्रनगर में उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत वार्षिक मेले का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ किया गया। मेले का शुभारंभ उपमंडलाधिकारी जोगिंद्रनगर मनीष चौधरी ने किया।


मेले में कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ-साथ विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजन में 30 से अधिक आकर्षक प्रदर्शनियां और स्टॉल्स लगाए गए, जिनमें स्थानीय व्यंजनों, पारंपरिक हस्तशिल्प, घरेलू उत्पादों और विद्यार्थियों की रचनात्मकता का सुंदर संगम देखने को मिला।


स्थानीय संस्कृति और व्यंजन रहे आकर्षण का केंद्र


मेले में तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजन, जैसे—सिड्डू, पटांडू, खीर-बब्रू, धाम के व्यंजन और किन्नौरी-मंडी क्षेत्र की विशेष डिशें—ने आगंतुकों का मन मोह लिया। साथ ही स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, बुनाई और सजावटी वस्तुएं भी लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनीं।


एसडीएम ने की प्रतिभागियों की सराहना


उपमंडलाधिकारी मनीष चौधरी ने स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए प्रतिभागियों की मेहनत और रचनात्मकता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि—


> “ऐसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ विद्यार्थियों और स्वयं सहायता समूहों को अपनी पहचान बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। प्रतिभागी चाहें तो अपने उत्पाद और कला को जिला और राज्य स्तर तक ले जाकर आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से मजबूत हो सकते हैं।”




प्राचार्य ने दिया भविष्य के आयोजनों का आश्वासन


कॉलेज की प्राचार्य प्रो. निशा वैद्य ने भी एसडीएम के साथ सभी स्टॉल्स का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए, ताकि छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक अनुभव और मंच मिल सके।


विद्यार्थियों की प्रतिभा ने जीता दिल


मेले में केवल प्रदर्शनियां ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और लोकगीतों की प्रस्तुतियां ने भी माहौल को और रंगीन बना दिया। उत्साहित विद्यार्थियों और आगंतुकों ने न केवल व्यंजनों का आनंद लिया बल्कि उत्साहपूर्वक खरीदारी भी की।


मेले का संदेश


यह मेला स्थानीय परंपरा, आत्मनिर्भरता और नवाचार का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। छात्रों से लेकर स्वयं सहायता समूहों तक, सभी प्रतिभागियों ने अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन किया, जिससे ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को भी बल मिला।

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