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मणिमहेश यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एबीवीपी ने उठाए सवाल

 मणिमहेश यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर एबीवीपी ने उठाए सवाल


चंबा : जितेन्द्र खन्ना /

लगातार भारी वर्षा और भूस्खलनों के चलते हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर जिला चंबा पर देखने को मिला है, जहां जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेषकर इस समय चल रही पवित्र मणिमहेश यात्रा प्राकृतिक आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुई है।


अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जिला चंबा के विभाग संयोजक अर्पित जरयाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण जिला चंबा के कई स्थानों पर भूस्खलन और सड़कें बाधित होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इन परिस्थितियों में मणिमहेश यात्रा मार्ग भी प्रभावित हुआ है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


इसी संदर्भ में परिषद के कार्यकर्ताओं ने एडीएम चंबा अमित मेहरा से मुलाकात की और प्रशासन से स्पष्ट जानकारी मांगी। एबीवीपी ने प्रशासन से आग्रह किया कि—


मणिमहेश यात्रा में अब तक जिन श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई है, उनका आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए।


भरमौर और यात्रा मार्ग पर फंसे हुए श्रद्धालुओं के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए प्रशासन ने क्या ठोस इंतज़ाम किए हैं, इसकी जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जाए।



अर्पित जरयाल ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में एबीवीपी प्रशासन और सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। इसी क्रम में परिषद ने 25 कार्यकर्ताओं की सूची एडीएम चंबा को वालंटियर के रूप में सौंप दी है, ताकि राहत और बचाव कार्यों में वे प्रशासन का सहयोग कर सकें।


उन्होंने अपील की कि चंबा के स्थानीय लोग भी आगे आएं और एक-दूसरे की मदद करें। जरयाल ने कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक हर नागरिक का यह फर्ज है कि वह अपने स्तर पर सहयोग के लिए तैयार रहे।


प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए विभाग संयोजक ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जब संपूर्ण प्रदेश आपदा की मार झेल रहा है और चंबा के लोग मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं, तब प्रदेश के मुखिया राज्य की जनता के बीच मौजूद होने के बजाय बिहार में राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री इस आपदा की घड़ी में जनता को संबोधित करें और राहत व पुनर्वास को लेकर

 ठोस घोषणाएं करें।

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