उपायुक्त किन्नौर ने की आदि कर्मयोगी अभियान की बैठक की अध्यक्षता, जनजातीय युवाओं को मिलेगा सशक्त नेतृत्व मंच - Smachar

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उपायुक्त किन्नौर ने की आदि कर्मयोगी अभियान की बैठक की अध्यक्षता, जनजातीय युवाओं को मिलेगा सशक्त नेतृत्व मंच

 उपायुक्त किन्नौर ने की आदि कर्मयोगी अभियान की बैठक की अध्यक्षता, जनजातीय युवाओं को मिलेगा सशक्त नेतृत्व मंच


रिकांगपिओ

उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने आज अपने कार्यालय कक्ष में आदि कर्मयोगी अभियान की बैठक की अध्यक्षता की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता का विकास करना है, ताकि आधुनिक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ नई पीढ़ी के युवा जनजातीय नेता तैयार किए जा सकें।


जनजातीय क्षेत्रों की चुनौतियाँ और नेतृत्व की आवश्यकता


बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में भौगोलिक दृष्टि से समस्याएं अधिक हैं। यहाँ विकासात्मक गतिविधियों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए न केवल सकारात्मक दृष्टिकोण, बल्कि कार्य के प्रति जुनून और प्रतिबद्धता की भी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि धरातल पर सशक्त नेतृत्व विकसित होगा तो जनजातीय समाज को आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की ओर अग्रसर करना संभव होगा।


सेवा, समर्पण और पारदर्शिता पर बल


उपायुक्त ने बताया कि आदि कर्मयोगी संस्था सेवा, समर्पण और संकल्प की भावना से कार्य करती है। संस्था का उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाना और स्थानीय व सार्वजनिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासात्मक योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित होगी। यह अभियान जनजातीय समाज के युवाओं को न केवल नेतृत्व प्रदान करेगा, बल्कि उनमें नवाचार, सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी का भाव भी जागृत करेगा।


अधिकारियों की भागीदारी


बैठक में जिला प्रशासन के विभिन्न अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें उपमंडलाधिकारी कल्पा अमित कल्थाईक, उपमंडलाधिकारी निचार नारायण सिंह चौहान, सहायक आयुक्त-उपायुक्त डॉ. ओम प्रकाश यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने अभियान को जनजातीय क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने के सुझाव भी साझा किए।


अभियान से अपेक्षित लाभ


इस अवसर पर उपायुक्त ने यह भी कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान से जनजातीय युवाओं को नेतृत्व के साथ-साथ शिक्षा, सामाजिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के कुशल उपयोग जैसे क्षेत्रों में भी योगदान का अवसर मिलेगा। इससे न केवल युवाओं की क्षमताएं बढ़ेंगी बल्कि जनजातीय समाज में समग्र विकास और आत्मनिर्भरता को भी नया आयाम मिलेगा।

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