कुल्लू-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग 3 के बार-बार बाधित होने से सेब बागवानों की मुश्किलें बढ़ीं - Smachar

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कुल्लू-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग 3 के बार-बार बाधित होने से सेब बागवानों की मुश्किलें बढ़ीं

 कुल्लू-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग 3 के बार-बार बाधित होने से सेब बागवानों की मुश्किलें बढ़ीं


पतलीकूहल : ओम बौद्ध /

हिमाचल प्रदेश में जारी भारी बारिश ने सेब बागवानों की कमर तोड़ दी है। खासकर कुल्लू–मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग-3 (NH-3) के बार-बार बाधित होने से बागवानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। मुख्य राजमार्ग के साथ-साथ ग्रामीण संपर्क मार्ग भी भूस्खलन और मलबा गिरने से बंद पड़े हैं, जिससे सेब तुड़ान और ढुलाई दोनों पर गहरा असर पड़ा है।


बारिश ने बिगाड़ा सेब सीजन


बीते दो दिनों तक मौसम साफ रहने से बागवानों को उम्मीद जगी थी कि अब हालात सुधरेंगे, लेकिन रविवार को फिर से हुई तेज बारिश ने सभी प्रयासों पर पानी फेर दिया। जगह-जगह सड़कें ध्वस्त होने और मार्ग अवरुद्ध होने से बागवानों को तुड़ान रोकना पड़ा। खेतों और बागों में तुड़ा हुआ सेब पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है।


गिर गए दाम, बागवान बैकफुट पर


आवागमन बाधित होने और सेब समय पर मंडियों तक न पहुंच पाने से बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है। स्थानीय सब्जी व फल मंडियों में सेब के दाम लगभग 50 प्रतिशत तक गिर चुके हैं।

पहले जो सेब 60–80 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह अब केवल 30–40 रुपये प्रति किलो में बेचना पड़ रहा है। इससे बागवानों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। बारिश, खराब सड़कों और गिरे हुए दामों ने कुल्लू–मंडी क्षेत्र के सेब उत्पादकों की आर्थिक हालत डावांडोल कर दी है।


सरकार और प्रशासन हरकत में


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार और जिला प्रशासन ने मार्गों की बहाली के कार्य को तेज कर दिया है। मनाली विधानसभा क्षेत्र के विधायक भुवनेश्वर गौड़ लगातार प्रभावित इलाकों का दौरा कर सड़कों की मरम्मत का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी एक बागवान हैं, इसलिए किसानों की पीड़ा को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार युद्धस्तर पर मार्गों की बहाली के प्रयास कर रही है और जल्द ही स्थिति सामान्य कर दी जाएगी।


बागवानों में रोष और चिंता


हालांकि, लगातार बारिश और गिरते दामों से बागवानों में चिंता और रोष दोनों गहराए हैं। उनका कहना है कि एक ओर वे प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं, दूसरी ओर मेहनत से उगाई गई फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। यदि जल्द ही सड़कें नहीं खुलीं तो उनका सीजन पूरी

 तरह चौपट हो जाएगा।

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