दारिणी धार में भूस्खलन और बाढ़ का कहर, भेड़पालकों को भारी नुकसान
दारिणी धार में भूस्खलन और बाढ़ का कहर, भेड़पालकों को भारी नुकसान
पशुधन मलबे और नालों में दबा, आजीविका पर संकट; ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत की लगाई गुहार
कांगड़ा
धौलाधार की ऊपरी पहाड़ियों के नीचे बसे दारिणी धार टीका क्षेत्र में प्रकृति का कहर लगातार जारी है। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने इस शांत इलाके को तबाही के मंजर में बदल दिया है। भारी बारिश के चलते यहां भूस्खलन और अचानक बने बाढ़ जैसे हालात ने ग्रामीणों, खासकर भेड़पालकों की जिंदगी और रोज़गार को गहरा आघात पहुँचाया है।
मलबे में दब गए मवेशी
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, घटारड़ा निवासी सुरिंदर कुमार और डिब्बा निवासी बालक राम की भेड़-बकरियां अचानक हुए भूस्खलन की चपेट में आ गईं। कई पशु उनके कोठों (पशु आश्रय स्थलों) में मलबे के नीचे दबकर मर गए, जबकि दर्जनों पशु नालों में आए तेज बहाव में बहकर लापता हो गए।
पीड़ित भेड़पालक सदमे में हैं और उनका कहना है कि पशुधन के नुकसान ने उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। उनके अनुसार, यही भेड़-बकरियां उनकी मुख्य आजीविका का साधन थीं, जिनके सहारे वे परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।
प्रशासन तक देर से पहुँची सूचना
भेड़पालकों का कहना है कि लगातार खराब मौसम और मोबाइल नेटवर्क बाधित रहने की वजह से वे समय रहते प्रशासन को सूचना नहीं दे पाए। बेहद कठिन परिस्थितियों में उन्होंने बीते दिन बड़ी मशक्कत के बाद पशु चिकित्सा विभाग को घटना की जानकारी दी।
ग्रामीणों की चिंताएँ बढ़ीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्राकृतिक आपदा केवल दो परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के भेड़पालकों में भय और असुरक्षा की भावना व्याप्त कर गई है। हर घर-परिवार का किसी न किसी रूप में पशुपालन से जीवन-यापन जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस तरह की घटनाओं से गांव के आर्थिक ढांचे पर गहरा असर पड़ सकता है।
राहत और मुआवजे की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग से आग्रह किया है कि प्रभावित परिवारों की तुरंत सुनवाई की जाए, नुकसान का आकलन किया जाए और मुआवजा प्रदान किया जाए। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए प्रशासन स्थायी समाधान और सुरक्षा उपाय लागू करे।
धौलाधार क्षेत्र में लगातार खतरा
गौरतलब है कि बीते कई दिनों से धौलाधार की पहाड़ियों में लगातार भारी वर्षा हो रही है। इससे न केवल भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं, बल्कि कई नाले और खड्डें उफान पर आ गए हैं। ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो गई है और पशुधन पर संकट मंडरा रहा है।
लोगों ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रशासन क्षेत्र में शीघ्र राहत एवं बचाव कार्य शुरू करे और पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद को प्राथमिकता दे।
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