ओल्ड मनाली के लोगों ने श्रमदान कर वाहन योग्य बनाई बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क
ओल्ड मनाली के लोगों ने श्रमदान कर वाहन योग्य बनाई बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क
48 घंटे में ग्रामीणों ने कर दिखाया मिसाल, मनालसु पुल तक बनाई 300 मीटर कच्ची सड़क
मनाली : ओम बौद्ध /
प्राकृतिक आपदा के बीच ओल्ड मनाली के लोगों ने सामूहिक श्रमदान की अनूठी मिसाल पेश की है। बीते दिनों आई भीषण बाढ़ के कारण अपनी जगह से खिसककर टेढ़ा हो चुके मनालसु पुल पर ग्रामीणों ने महज 48 घंटे के भीतर वाहन योग्य अस्थायी सड़क तैयार कर दी।
युवाओं ने बनाया मानव श्रृंखला
मौसम खुलते ही बुधवार को पूरा गांव सड़क बहाली में जुट गया। युवाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर कंकरीट, मिट्टी व पत्थरों को पुल के दोनों छोर तक पहुँचाया।
ग्रामवासियों ने तय किया कि आधा गांव बुधवार और शेष आधा गांव शुक्रवार को श्रमदान करेगा। इस सामूहिक प्रयास से न सिर्फ पुल के दोनों सिरों पर कंकरीट डाली गई, बल्कि पुल तक पहुँचने के लिए लगभग 300 मीटर लंबी कच्ची सड़क का निर्माण भी कर लिया गया।
विभागीय मशीनरी भी लगी काम पर
हालांकि इस कार्य में ग्रामीणों के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग के मजदूरों और जेसीबी मशीनों की भी मदद ली गई, लेकिन लोगों के सामूहिक सहयोग से काम कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ा।
अभी वाहनों को अनुमति नहीं
ग्राम समिति के सदस्य दुनी चंद ठाकुर ने बताया कि अस्थायी तौर पर सड़क को तैयार कर दिया गया है। लेकिन अभी इस पर वाहनों को चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सीमेंट पूरी तरह सेट होने के बाद ही वाहन चलाने की अनुमति दी जाएगी। पहले ट्रायल के तौर पर कुछ वाहन चलाए जाएंगे, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
आसपास की पंचायतों को मिलेगा लाभ
इस पुल और सड़क के बहाल होने से केवल ओल्ड मनाली ही नहीं, बल्कि शनाग, पलचान और बुरुआ पंचायतों के ग्रामीण भी राहत महसूस करेंगे। यह सड़क इन क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा का काम करती है, क्योंकि मनाली शहर से संपर्क का यह प्रमुख मार्ग है।
श्रमदान की मिसाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में एकजुटता और सामूहिक प्रयास से ही बड़े कार्य संभव हो पाते हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन ग्रामीणों के श्रमदान ने दिखा दिया कि संकल्प और सहयोग से कठिनाइयों को पार किया जा सकता है।
कोई टिप्पणी नहीं