कोकसर भूस्खलन के दौरान एनसीसी कैडेटों ने दिखाई बहादुरी, कई नागरिकों को बचाया
कोकसर भूस्खलन के दौरान एनसीसी कैडेटों ने दिखाई बहादुरी, कई नागरिकों को बचाया
केलांग : ओम बौद्ध /
लाहौल जिले के कोकसर में हुए विनाशकारी भूस्खलन के दौरान एनसीसी (1 एचपी एयर स्क्वाड्रन) के कैडेटों ने जिस तरह का साहस और सेवा भाव दिखाया, उसने सभी का दिल जीत लिया।
बारिश, गिरते पत्थरों और मलबे से घिरी खतरनाक स्थिति में भी कैडेटों ने न केवल बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया, बल्कि अपने अनुशासन और प्रशिक्षण से "सेवा परमो धर्मः" की भावना को साकार किया।
खतरे के बीच कैडेट आगे आए
शुक्रवार देर रात भारी बारिश से कोकसर क्षेत्र में बड़ा भूस्खलन हुआ। कई यात्री और स्थानीय लोग बीच रास्ते में फँस गए। इसी दौरान कैडेट अतुल कौशल, कैडेट रोहित, कैडेट नरेश, कैडेट पंकज और कैडेट काव्यांश ने जोखिम उठाते हुए एक भीड़भाड़ वाले और क्षतिग्रस्त पुल को पार किया।
उन्होंने बुजुर्ग महिलाओं, छोटे बच्चों और अन्य पर्यटकों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। उनकी इस वीरता को देखकर स्थानीय लोग और सुरक्षाकर्मी दोनों भावुक हो उठे और उनकी जमकर सराहना की।
मैराथन से लौटते वक्त फँसे थे कैडेट
कैडेट दल भारतीय सेना द्वारा आयोजित "सूर्य स्पीति मैराथन" और "सूर्य द्रोणाचार्य दौड़" में भाग लेकर लौट रहा था।
सड़क अवरोधों और खराब मौसम के कारण उन्हें कोकसर ट्रांजिट कैंप और सीपीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में रुकना पड़ा। लेकिन जैसे ही भूस्खलन हुआ, कैडेटों ने देर न करते हुए तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया।
28 सदस्यीय दल ने दिखाया अनुशासन
इस एनसीसी दल में कुल 28 सदस्य थे, जिनमें 11 महिला कैडेट भी शामिल थीं। दल का नेतृत्व जीसीआई पूजा, सार्जेंट मंदीप, कॉर्पोरल साहिल और हिमाचल होमगार्ड के गुलशन कर रहे थे।
दल ने लाहौल-स्पीति की कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए अद्वितीय सामूहिक अनुशासन और सहयोग का परिचय दिया।
प्रतियोगिताओं में भी चमके कैडेट
यात्रा के दौरान कैडेट शिवांगी ठाकुर ने महिलाओं की 10 किलोमीटर श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त किया और 10,000 रुपये का पुरस्कार जीतकर अपने स्क्वाड्रन का गौरव बढ़ाया। वहीं कैडेट जितेंद्र कुमार ने समग्र प्रभारी के रूप में दल का संचालन किया और पूरी यात्रा के दौरान अनुशासन और समन्वय सुनिश्चित किया।
कमांडिंग ऑफिसर का प्रेरणादायी उदाहरण
इस पूरे दल के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर कुणाल शर्मा ने भी अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के 79 वर्षों के प्रतीक के रूप में "कुंजुम ला दर्रे से काजा तक 79 किलोमीटर" की कठिन स्पीति अल्ट्रा चैलेंज रेस को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद वे स्वयं कैडेटों के साथ मैराथन में शामिल हुए।
स्थानीय लोगों ने की सराहना
कोकसर के ग्रामीणों ने कहा कि कैडेटों ने जिस तरह बिना किसी डर के आगे बढ़कर लोगों को बचाया, वह वास्तव में सैनिक भावना का प्रतीक है। कई लोगों का मानना है कि यदि कैडेट समय पर मदद न करते, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन ने भी एनसीसी कैडेटों के साहस और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे युवा देश का भविष्य हैं। उनके इस कार्य से साबित होता है कि एनसीसी सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का भी विद्यालय है।
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