रिवालसर में बौद्ध श्रद्धालुओं के प्रवास के दौरान कूड़ा-कचरा प्रबंधन पर उठे सवाल - Smachar

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रिवालसर में बौद्ध श्रद्धालुओं के प्रवास के दौरान कूड़ा-कचरा प्रबंधन पर उठे सवाल

 रिवालसर में बौद्ध श्रद्धालुओं के प्रवास के दौरान कूड़ा-कचरा प्रबंधन पर उठे सवाल


रिवालसर 

 त्रिवेणी धर्म स्थली रिवालसर में हर वर्ष दिसंबर से मार्च माह तक बौद्ध धर्म के श्रद्धालुओं का प्रवास रहता है। इस अवधि में देश–विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जिससे नगर में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ चहल-पहल भी बढ़ जाती है। हालांकि, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण नगर में कूड़ा-कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रवास अवधि के दौरान नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था कई बार चरमरा जाती है। कुछ स्थानों पर कूड़ा-कचरा खुले में फेंक दिया जाता है, जिससे गंदगी फैलने के साथ-साथ वातावरण भी दूषित हो रहा है। इससे न केवल धार्मिक स्थलों की पवित्रता प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

इस स्थिति को देखते हुए नगरवासियों ने नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि मकान मालिकों के लिए एक स्पष्ट एडवायजरी जारी की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को ठहराने वाले भवनों में कूड़ा-कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। साथ ही दिसंबर से मार्च तक विशेष सफाई अभियान चलाकर कूड़ा-कचरा प्रबंधन के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जाने की भी मांग की गई है।

नगर पंचायत के उपाध्यक्ष श्री कश्मीर सिंह यादव ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि नगर पंचायत द्वारा सभी नगरवासियों से अपील की गई है कि जिन मकान मालिकों ने किराएदार रखे हैं, वे अपने किराएदारों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत के सफाई कर्मचारी नियमित रूप से घरों से कूड़ा एकत्र करेंगे, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि कूड़ा निर्धारित स्थानों और डस्टबिन में ही रखा जाए।

उन्होंने यह भी अपील की कि सभी मकान मालिक अपने किराएदारों को स्पष्ट रूप से निर्देश दें कि कूड़ा-कचरा इधर-उधर न फेंकें और केवल डस्टबिन का ही प्रयोग करें, ताकि रिवालसर की स्वच्छता, धार्मिक गरिमा और प्राकृतिक पवित्रता बनी रह सके।

वहीं, श्रद्धालुओं से भी आग्रह किया गया है कि वे नगर की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें और रिवालसर की धार्मिक एवं प्राकृतिक विरासत का सम्मान करते हुए अपनी आस्था का निर्वहन करें।

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