VB-G-RAM-G की योजना का विरोध नहीं है बल्कि राम जी के नाम से ही कांग्रेस को नफरत है, यह बिल्कुल सत्य है कि - त्रिलोक कपूर।
VB-G-RAM-G की योजना का विरोध नहीं है बल्कि राम जी के नाम से ही कांग्रेस को नफरत है, यह बिल्कुल सत्य है कि - त्रिलोक कपूर।
भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय परिषद के सदस्य त्रिलोक कपूर ने उक्त शब्द आज पालमपुर में आयोजित प्रैस वार्ता को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भारत में ग्रामीण रोजगार का एक विशेष महत्व है। यह केवल कमजोर परिवारों की आय की सुरक्षा नहीं देता बल्कि ग्राम विकास स्थिरता का भी एक साधन है। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने देश की जनता को यह भरोसा दिया था कि इस देश की सरकार जवान युवाओं, गरीबों, पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों, शोषित और वंचित वर्गों के लिए समर्पित सरकार होगी।
भाजपा नेता कपूर ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि जब नरेंद्र भाई मोदी जी ने मनरेगा को एक व्यवहारिक रूप देने के लिए विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार व अजीविका मिशन ग्रामीण के रूप में भारत को रोजगार, सम्मानजनक दिहाड़ी, और समयबद्ध भुगतान की मजबूत गारंटी प्रदान करने का प्रयास किया तो कांग्रेस के लोगों को योजना के नाम पर पेट में मरोड़ पड़ गए, जबकि यह योजना गरीब कल्याण गांवों के समग्र विकास और आत्म निर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल है।
कपूर ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को अधिक दिहाड़ी के साथ रोजगार की सुनिश्चित गारंटी मिलेगी, साथ ही मजदूरी का भुगतान जो पहले 15 दिनों में होता था वह अब 7 दिनों में सीधे श्रमिकों के खातों में किया जाएगा। यदि किसी कारणवश निर्धारित समय में भुगतान नहीं होता है तो ब्याज सहित भुगतान प्रदान करने का इस विधेयक में प्रावधान किया गया है।
कपूर ने कहा कि इस मिशन के अंतर्गत पंचायतों को सशक्त बनाने हेतु अपने क्षेत्र के विकास कार्य स्वयं तय करने का अधिकार दिया गया है। सभी विकास कार्यों में जियो टैगिंग और आधार कार्ड आधारित स्थयापना भी किए जाने का प्रावधान है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
भाजपा नेता त्रिलोक कपूर ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की इस योजना के आकार में निश्चित रूप से ग्रामीण भारत की तस्वीर विकास की दृष्टि से मजबूत होगी और हिमाचल जैसे हिमालय राज्य के लिए 90 प्रतिशत केंद्र का सहयोग और 10 प्रतिशत राज्य सरकार को करना होगा। इस योजना के अंतर्गत जहां पर पहले 100 दिन के रोजगार का प्रावधान था अब इस मिशन में 125 दिनों का प्रावधान किया गया है। अगर किन्हीं कारणों से किसी पात्र व्यक्ति को रोजगार नहीं मिलता है तो उसे भत्ता देने का प्रावधान भी किया गया है।
यह योजना चार मुख्य विषयों पर ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अजीविका पर केंद्रित है। इस योजना में प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, यह योजना पूरी तरह टैक्नोलॉजी पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि जब इस मनरेगा की योजना में सुधार की दृष्टि से 100 से 125 दिनों की दिहाड़ी बढ़ाना, 15 के बजाए 7 दिनों में श्रमिकों के पैसे को भुगतान और भ्रष्टाचार को रोकने में पारदर्शिता लाना जैसे सराहनीय कदम बढ़ाने का प्रयास किया गया है तो फिर कांग्रेस सरकार को VB-G-RAM-G नाम पर परेशानी क्यों है।
कपूर ने कहा कि 1980 में जब यह योजना लागू हुई थी और 1989 में कांग्रेस ने इसका नाम जवाहर रोजगार योजना रखा, 1999 में फिर इस योजना का नाम जवाहर स्मृति योजना रखा, फिर 2001 में संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना और जब 2005 में फिर कांग्रेस की सरकार आई तब इसका नाम नरेगा (National Rural Employment Gaurantee Act.) और 2009 में महात्मा गांधी याद आए और यही नहीं उस समय भी मनरेगा में 30 से 40 हजार करोड़ का बजट होता था लेकिन वह भी खर्च नहीं हो पाता था। लेकिन जब नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने कोरोना काल खंड में भी 1 लाख 11 हजार करोड़ का बजट दिया।


कोई टिप्पणी नहीं