मंडी में धाज्जा लोकनाट्य कार्यक्रम: पहली बार हार की जगह राष्ट्रीय झंडा दिया गया
मंडी में धाज्जा लोकनाट्य कार्यक्रम: पहली बार हार की जगह राष्ट्रीय झंडा दिया गया
मंडी : अजय सूर्या /
धार्मिक आस्था, लोकसंस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर मंडी के ऐतिहासिक सेरी मंच पर बाबा सिद्ध चानो बली सच्ची सरकार को समर्पित धाज्जा लोकनाट्य कार्यक्रम का आयोजन धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर हर जाति-धर्म के श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे समरसता और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा उदाहरण देखने को मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय दलित पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग परिषद के महासचिव व राज्य प्रवक्ता चमन राही ने की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष धाज्जा कार्यक्रम में पहली बार पारंपरिक हार पहनाने के स्थान पर राष्ट्रीय झंडा प्रदान किया गया और सभी से तिरंगे का सम्मान करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सिद्ध धाम समैला दरबार के गद्दीनशीन महंत श्री चमन जी महाराज ने ज्योति प्रज्वलित कर किया। महंत जी ने अपने संबोधन में धाज्जा की परंपरा, उसके गीतों, स्वांग और लोकमान्यताओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाबा सिद्ध चानो को कलयुग में न्याय के देवता माना जाता है, जो अपने भक्तों को न्याय दिलाने के साथ-साथ कोर्ट-कचहरी के झंझटों से भी मुक्ति प्रदान करते हैं।
धाज्जा नाट्य में बाबा बौंरा स्वांग के आग के करतब और तलवार नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष चंपा ठाकुर, नगर निगम मंडी महापौर वीरेंद्र भट्ट, पार्षद, सामाजिक एवं धार्मिक संगठन के गणमान्य लोग और राष्ट्रीय खिलाड़ी भूपेंद्र उर्फ काहू सहित कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
धाज्जा हिमाचल की प्राचीन लोकनाट्य परंपरा है, जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ न्याय, लोकसंस्कृति और सामाजिक चेतना का प्रतीक मानी जाती है। इसमें पारंपरिक स्वांग, गीत, कथा-वाचन और संस्कारों का सामूहिक प्रदर्शन किया जाता है। लोकविश्वास है कि बाबा सिद्ध चानो अपने भक्तों को अन्याय और झूठे मुकदमों से मुक्ति दिलाते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इसे धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का शानदार उदाहरण बताया और तिरंगे के प्रति सम्मान की नई परंपरा को सराहा।


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