पंचायत चुनाव टालकर सरकार लोकतंत्र से कर रही खिलवाड़ : जय सिंह - Smachar

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पंचायत चुनाव टालकर सरकार लोकतंत्र से कर रही खिलवाड़ : जय सिंह

 पंचायत चुनाव टालकर सरकार लोकतंत्र से कर रही खिलवाड़ : जय सिंह


पंचायती राज के तहत पूरे प्रदेश में पंचायत का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो रहा है, जिससे पहले पंचायत का चुनाव किया जाना बहुत जरूरी है, लेकिन प्रदेश की सरकार अभी चुनाव करवाने के पक्ष में नहीं है जबकि चुनाव के लिए अधिकतर ने तैयारी पूरी कर ली है। सरकार आपदा का बहाना बनाकर चुनाव टाल रही है। सरकार ने अपने कार्यकाल में कुछ नहीं किया है जिस बात का अभास कांग्रेस को पूरी तरह से है, जिसका नतीजा पंचायत में ही सामने आ जाएगा। हालांकि पंचायत के चुनाव किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं होते हैं, लेकिन यह सरकार की नाकामी को पूरी तरह से साफ कर देगा। यह बात ग्राम पंचायत भनौता में आयोजित पोल खोल अभियान कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जय सिंह ने लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने गरीब लोगों को सूची से बाहर करने का गलत निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार के मुताबिक प्रदेश में 90 प्रतिशत लोग अमीर हो गए हैं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। सरकार ने इसके लिए कमेटी गठित की गई है जो बी.पी.एल. सूची को तय कर रही है। सरकार के मुताबिक विकास खंड चम्बा के अठलुंई और मंगला पंचायत में कोई गरीब नहीं बचा है। हाल ही में मैहला ब्लॉक में भी 7087 नाम काट दिए गए हैं। अब 1157 ही रह गए हैं। प्रदेश में लाखों बी.पी.एल. परिवारों का गला घोंटने का काम कांग्रेस सरकार द्वारा सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। गरीबों का हक छीना जा रहा है। यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि गरीबों को योजनाओं से बाहर करने की साजिश है। इस पूरी चयन प्रक्रिया में पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधियों- वार्ड पंच, प्रधान, उप-प्रधान, बी.डी.सी. सदस्य, जिला परिषद सदस्य-किसी को भी विश्वास में नहीं लिया गया, न कोई बैठक बुलाई गई और न ही जमीनी स्तर की सच्चाई जानी गई। उन्होंने कहा कि यह काम सीधे सीधे कांग्रेस के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और मुख्यमंत्री के दबाव में प्रशासन से करवाया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला अपमान है। हिमाचल के इतिहास में पहली बार अत्यंत निर्धन परिवारों पर इस स्तर की तानाशाही की जा रही है। कांग्रेस सरकार गरीबों की विरोधी है और अब जब उसका असली चेहरा उजागर हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पर पूरी तरह ताला लगा दिया गया है। पंचायतों में विकास के लिए जारी धनराशि प्रदेश सरकार ने वापस मंगवा ली है और शेष राशि से होने वाले कार्य भी रोक दिए गए हैं, जिससे गांवों में सड़क, पानी, भवन और अन्य बुनियादी विकास कार्य ठप पड़े हैं। मनरेगा के कार्य लगभग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं और केंद्र सरकार द्वारा लाई गई जी राम जी योजना को भी प्रदेश में शुरू नहीं किया गया है। विकसित भारत के लक्ष्य के तहत बनी इस योजना से गरीबों को मिलने वाली 125 दिन की रोजगार गारंटी से प्रदेश के ग्रामीणों को जानबूझकर वंचित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा इस अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

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