58 वर्ष की नौकरी का झूठ, युवाओं के साथ विश्वासघात और जी राम जी योजना पर कांग्रेस की राजनीतिक बाज़ीगरी
58 वर्ष की नौकरी का झूठ, युवाओं के साथ विश्वासघात और जी राम जी योजना पर कांग्रेस की राजनीतिक बाज़ीगरी
पालमपुर
पूर्व मंत्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार सत्ता में आने से पहले किए गए अपने वादों से न केवल मुकर चुकी है, बल्कि आज उसकी नीतियाँ और फैसले यह साबित कर रहे हैं कि यह सरकार युवाओं, गरीबों और मेहनतकश वर्ग के साथ विश्वासघात की राजनीति कर रही है। प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को चुनावों से पहले “58 वर्ष तक पक्की नौकरी” देने का जो दावा बड़े-बड़े मंचों से किया गया था, वह आज पूरी तरह से झूठ और छलावा साबित हो चुका है।
सुलाह विधानसभा क्षेत्र के धीरा, चंबी और पनापर में जनसंपर्क अभियान में लोगों को संबोधित करते हुए परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग, हमीरपुर द्वारा जारी हालिया सरकारी विज्ञापन ने कांग्रेस सरकार के इस झूठ को उजागर कर दिया है। अंग्रेज़ी और गणित विषय के 312-312 पदों के नाम पर जो सच्चाई सामने आई है, वह अत्यंत चिंताजनक और युवाओं के भविष्य के साथ क्रूर मज़ाक है। इन पदों में एक भी पद स्थायी नहीं है, नियमित सरकारी सेवा का कोई प्रावधान नहीं, केवल 10 माह की अस्थायी नियुक्ति, और मात्र ₹30,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय निर्धारित किया गया है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस अस्थायी व्यवस्था को छिपाने के लिए इसे बड़े ही योजनाबद्ध ढंग से
“पेशेवर शिक्षक के रूप में संविदा आधारित नियुक्ति की उप-योजना” का नाम दे दिया गया है। सवाल यह है कि जब न सेवा नियम हैं, न भविष्य की सुरक्षा और न ही नौकरी की स्थिरता—तो इसे रोजगार कैसे कहा जा सकता है? यह रोजगार नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं के सपनों के साथ खुली ठगी है।
नाम बदले, शब्द बदले—लेकिन नीति वही धोखेबाजी...
कांग्रेस सरकार की कथनी और करनी का अंतर अब पूरी तरह जनता के सामने आ चुका है।
पहले—नियमित पद, स्पष्ट सेवा नियम, भविष्य की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा।
आज—संविदा आधारित नियुक्ति, सीमित और अस्थायी मानदेय, और पूरी तरह अनिश्चित भविष्य।
यह शिक्षा सुधार नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं को अस्थायी जीवन में धकेलने की साजिश है। कांग्रेस सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या यही वह “व्यवस्था परिवर्तन” है, जिसका वादा प्रदेश की जनता से किया गया था?
जी राम जी योजना: गरीबों की जीवनरेखा, राजनीति का औजार नहीं
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जिसे आम जनमानस में जी राम जी योजना कहा जाता है, केंद्र सरकार द्वारा संचालित देश की सबसे प्रभावी और विश्वसनीय जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र परिवारों को 125 दिनों तक सुनिश्चित रोजगार प्रदान किया जाता है। यह योजना केवल मजदूरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के आत्मसम्मान, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है।
जी राम जी योजना ने वर्षों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, पलायन को रोका है और संकट के समय लाखों परिवारों को सहारा दिया है। यह योजना राजनीति के लिए नहीं, बल्कि गरीब के पसीने और श्रम के सम्मान के लिए बनाई गई थी।
मुख्यमंत्री का धरना: सत्ता में रहकर विरोध की राजनीति
अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और विरोधाभासी स्थिति यह है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री आज अपने मंत्रियों और विधायकों के साथ केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही जी राम जी योजना के नाम और स्वरूप को लेकर धरने पर बैठे हैं। प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि जब मुख्यमंत्री स्वयं सत्ता में हैं, तो वे किसके खिलाफ और क्यों धरना दे रहे हैं?
धरना देना विपक्ष का कार्य होता है, मुख्यमंत्री का नहीं। मुख्यमंत्री का पद समाधान, नेतृत्व और गरिमा का प्रतीक होता है, न कि सड़क पर बैठकर राजनीतिक दबाव बनाने का माध्यम। यह धरना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कांग्रेस सरकार निर्णय लेने में असमर्थ, दिशाहीन और आंतरिक रूप से विफल हो चुकी है।
यह विरोध गरीबों के हित में नहीं, बल्कि अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने की राजनीतिक बाज़ीगरी है। जब युवाओं को पक्की नौकरी देने का वादा झूठा साबित हो गया, जब रोजगार अस्थायी संविदाओं में बदल गया, जब शिक्षा और रोजगार दोनों मोर्चों पर सरकार विफल रही—तो अब कांग्रेस जी राम जी योजना के नाम पर राजनीति कर रही है।
कांग्रेस का असली चेहरा अब बेनकाब
एक ओर युवाओं से स्थायी नौकरी का झूठा वादा,
दूसरी ओर अस्थायी और अनिश्चित नियुक्तियाँ।
एक ओर गरीबों के नाम पर भाषण,
दूसरी ओर योजनाओं की आत्मा से छेड़छाड़।
एक ओर सत्ता में बैठकर जिम्मेदारी से पलायन,
दूसरी ओर धरनों और विरोधाभास की राजनीति।
भारतीय जनता पार्टी यह स्पष्ट करना चाहती है कि जी राम जी योजना गरीबों की थाली और मजदूर के अधिकार से जुड़ी योजना है, न कि कांग्रेस की राजनीतिक प्रयोगशाला का हिस्सा। इसके नाम, स्वरूप या मूल भावना के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रदेश का युवा, किसान और मजदूर अब कांग्रेस के झूठे वादों में आने वाला नहीं है। हिमाचल प्रदेश की जनता सब देख रही है, सब समझ रही है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब भी देगी। झूठ की राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलती, और कांग्रेस सरकार इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बन चुकी है।
विपिन सिंह परमार
(विधायक सुलह, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश)


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