बंद हो चुके कांगड़ा रेल घाटी के सभी 16 फाटक अब ऐसे 24 रास्ते भी बंद जा रहे हैं अंग्रेजों के जमाने मे दी गईं थी यह सुविधा
बंद हो चुके कांगड़ा रेल घाटी के सभी 16 फाटक अब ऐसे 24 रास्ते भी बंद जा रहे हैं अंग्रेजों के जमाने मे दी Priy थी यह सुविधा
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर कांगड़ा घाटी रेल 1932 में जब अंग्रेजी शासन काल में शुरू हुई थी तब रेल ट्रैक के दूसरी ओर बसे अनेक गांवों के लोगों के लिए रेल फाटक तथा कैटल क्रॉसिंग का प्रवधान किया गया था l उस समय यह काँगड़ा घाटी रेल मे 16 फाटक त24 कैटल क्रॉसिंग रास्तों की सुविधा अंग्रेजों के कार्यकाल में प्रदान की गई थीl एन डी ए की सरकार में रेलवे मंत्रालय द्वारा अभी हाल ही के वर्षों में सभी फाटको पर रेल कर्मचारी हटाए जा चुके हैं l अव रेलवे कैटल क्रॉसिंग को भी बंद किया जा रहा हैl प्रत्यादर्शयो के अनुसार लोहे के मोटे गार्डर लगाकर मोके पर फिलाल इन्हें बंद कर दिया गया है l अभी तक ट्रैक के आर पार जाने के लिए लोग अपने पशुधन तथा दो पहिया वाहनों को इस रास्ते से गुजारा करते थे l रेलवे द्वारा यह सुविधा छीन लिए जाने के कारण प्रभावित रोग अत्यंत दुखी है l क्षेत्रवासियों का कहना है कि जहाँ रेलवे वर्तमान में कई प्रकार की सुविधा देखकर जनता को लाभ पहुंचा रही थी वहां अब उनसे वह सुविधा भी छीनी जा रही है इस मामले में जेड आर यू सी सी ( उत्तरीरेलवे ) दीपक भारद्वाज का कहना है कि लोगों की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने दिल्ली में कल रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू से समय मांगा है और उन्होंने यह कहा कि इस की प्रतिलिपि जी एम दिल्ली व डी आर एम व रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को ईमेल के द्वारा भेजी गई है उन्होंने यह बताया कि छतरौली निवासी बलदेव सिंह पठानिया के द्वारा इस समस्या के बारे में बताया गया था l उन्होंने आश्वासन दिया कि वह रेलवे बोर्ड कमेटी की बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से जनहित उठाएंगे l उन्होंने कहा कि कांगड़ा चंबा लोकसभा सांसद ने भी इस मामले में गंभीरता से जनहित में कार्यवाही करने के लिए रेलवे मंत्रालय से आग्रह किया है l


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