अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी शिफ्टिंग को लेकर बल्ह विधायक इंद्र सिंह गांधी का मुख्यमंत्री पर बड़ा हमला
अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी शिफ्टिंग को लेकर बल्ह विधायक इंद्र सिंह गांधी का मुख्यमंत्री पर बड़ा हमला
नेरचौक : अजय सूर्या /
नेरचौक स्थित अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी को सरकाघाट स्थानांतरित किए जाने के फैसले को लेकर हिमाचल प्रदेश की राजनीति में घमासान मच गया है। बल्ह विधानसभा क्षेत्र के विधायक इंद्र सिंह गांधी ने इस निर्णय को मंडी जिला के साथ खुला भेदभाव करार देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला है।
इंद्र सिंह गांधी ने कहा कि यह फैसला न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि इससे सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बदले की भावना से कार्य कर रहे हैं और मंडी जिला को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। विधायक ने कहा कि नेरचौक में अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए सभी मूलभूत व आधुनिक सुविधाएं पहले से मौजूद हैं, ऐसे में बिना किसी ठोस कारण के यूनिवर्सिटी को शिफ्ट करना समझ से परे है।
बल्ह विधायक ने दावा किया कि यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत छात्र इस फैसले से असंतुष्ट हैं और वे कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर चुके हैं। उनके अनुसार छात्रों ने सभी आवश्यक दस्तावेज जुटा लिए हैं और इस स्थानांतरण के खिलाफ न्यायालय से स्टे लेने की प्रक्रिया शुरू करने वाले हैं। इंद्र सिंह गांधी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वे स्वयं न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
मुख्यमंत्री पर तीखा प्रहार करते हुए इंद्र सिंह गांधी ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार इसी तरह मनमाने फैसले लेती रही, तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस का सफाया हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा 60 से अधिक सीटें जीतेगी, जबकि कांग्रेस सिमटकर मात्र 8 सीटों पर रह जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए विधायक ने कहा कि प्रदेश की जनता उन्हें एक “ड्रामेबाज मुख्यमंत्री” के रूप में याद रखेगी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी शिफ्ट करने के फैसले से मंडी जिला के लोगों में भारी रोष है और यह कदम क्षेत्रीय संतुलन के खिलाफ है।
कुल मिलाकर, अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी को नेरचौक से सरकाघाट स्थानांतरित करने के निर्णय ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार जनविरोध और संभावित कानूनी कार्रवाई के बीच अपने फैसले पर कायम रहती है या इसमें कोई बदलाव करती है।


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