उत्तर-पश्चिमी हिमालयी कम-कार्बन निर्माण पर सीएसआईआर रुड़की में सफल कार्यशाला का हुआ आयोजन ।
उत्तर-पश्चिमी हिमालयी कम-कार्बन निर्माण पर सीएसआईआर रुड़की में सफल कार्यशाला का हुआ आयोजन ।
मनाली : ओम बौद्ध /
सीएसआईआर-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की ने 7 से 9 जनवरी तक 'भारतीय वास्तुकला शिल्पकला: कार्यशाला सह विचार-मंथन' का सफल आयोजन किया गया। संस्थान के स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और भारतीय पारंपरिक आवास उत्थान पुरस्कार 2.0 के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली से प्राप्त कम-कार्बन निर्माण सामग्री (IHP24003) पर केंद्रित रही। कार्यशाला के विशेष आकर्षण के रूप में हिमालयन ब्रदर्स ट्रस्ट फॉर आर्ट, कल्चर एंड हेरिटेज (एचबीटीएसीएच) ने लकड़ी नक्काशी (वुड कार्विंग) पर कार्यशाला आयोजित की, जिसका नेतृत्व ब्रिघु आचार्य ने किया। उनके साथ वरिष्ठ कारीगर सेस राम ठाकुर और अखिल शर्मा ने पारंपरिक हिमालयी लकड़ी नक्काशी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। देशभर से आए विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इसमें भाग लिया, जिनमें मुंबई का इंडियन एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, पुणे का विश्वकर्मा विश्वविद्यालय-स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, विजयवाड़ा का स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली की नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, बेंगलुरु की रेवा यूनिवर्सिटी तथा तमिलनाडु का पेरियार मणिअम्मई इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी शामिल रहे। एचबीटीएसीएच टीम के लिए यह संवाद और प्रशिक्षण अत्यंत प्रेरणादायक साबित हुआ। ब्रिघु आचार्य ने कहा, "छात्रों को पारंपरिक शिल्प सिखाना और उनसे संवाद करना भारत की वास्तुकला विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।"


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