"रोज़ गिरफ्तारियां, फिर भी नशा बेखौफ आखिरकार सिस्टम मे कमी कहां है?"
"रोज़ गिरफ्तारियां, फिर भी नशा बेखौफ आखिरकार सिस्टम मे कमी कहां है?"
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर हिमाचल प्रदेश कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत सामाजिक वातावरण और संस्कारित युवा पीढ़ी के लिए जाना जाता था। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब प्रदेश के किसी न किसी जिले से चिट्टा या अन्य मादक पदार्थों की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी की खबर सामने न आती हो। कभी दो युवक, कभी महिला तस्कर, कभी अंतरराज्यीय गिरोह ऐसा लगता है कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब एक अंतहीन सिलसिला बनकर रह गई है। यह जानकारी ब्लड डोनर क्लब के प्रधान राजीव पठानिया ने देते हुए बताया कि यह स्थिति एक असहज प्रश्न खड़ा करती है। यदि पुलिस रोज़ कार्रवाई कर रही है तव फिर रोज़ गिरफ्तारियां हो रही हैं और रोज़ नशीले पदार्थ बरामद हो रहे हैं, तो फिर नशे का कारोबार कमजोर क्यों नहीं पड़ रहा? आखिर यह व्यापार लगातार कैसे पनप रहा है? इसलिए केवल गिरफ्तारियों के आंकड़े बढ़ा देना इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता।ऐसे अनेको मामलों में आरोपी कुछ समय बाद जमानत पर बाहर आ जाते हैं और फिर उसी अवैध कारोबार में सक्रिय पाए जाते हैं। यदि ऐसी स्थिति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब प्रदेश की जेलों में सबसे बड़ी संख्या नशा तस्करी के आरोपियों की होगी। लेकिन क्या जेलें भर जाना सरकार की सफलता मानी जाएगी? ऐसे अनेको प्रश्न आज भी जनता के जवान पर चर्चित हैं की क्या हिमाचल चिट्टा नशा मुक्त हो सकेगा l प्रदेश में व्यवस्था परिवर्तन करने आई सरकार क्या नशे के खिलाफ लड़ाई लड़कर प्रदेश को चिट्टा मुक्त कर सकेगी? चिट्टा मुक्त प्रदेश बनाने के लिए व्यवस्था परिवर्तन सरकार में नशे के सौदागरों की काफी प्रॉपर्टी सरकार द्वारा सीज की गई है l नशे से अर्जित अवैध संपत्ति पर भी निर्णायक प्रहार होना चाहिए। जब तक इस कारोबार की आर्थिक रीढ़ नहीं टूटेगी, तब तक नए चेहरे इस धंधे में आते रहेंगे। जिस दिन नशे से कमाई गई संपत्ति जब्त होना सामान्य नियम बन जाऐगा उसी दिन इस अवैध व्यापार का आकर्षण भी कम होना शुरू होगा जिसके लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस कड़ी मशक्त सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से एक जागरूक प्रोग्राम की बातें प्रदेश में हर पंचायत में जुटी है l सीमावर्ती क्षेत्रों और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर भी पुलिस की पहली नजर है l नशे का यह कारोबार किसी एक जिले या एक राज्य तक सीमित नहीं है। इसलिए पड़ोसी राज्यों की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान और संयुक्त अभियान के माध्यम से भी भविष्य में एक जागरूक कार्यक्रम की तरह लोगों को जागरूक करना होगा l हिमाचल प्रदेश में आज सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि रोज़ कितने तस्कर पकड़े जा रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि रोज़ कितने नए युवा नशे के ग्राहक बन रहे हैं। जिस दिन इस प्रश्न का उत्तर बदल जाएगा उसी दिन गिरफ्तारी के आंकड़े भी बदलने लगेंगे इसके लिए सरकार के तंत्र को पंचायती राज संस्थाओं में चुने गए निर्वाचित लोगों से भी अपने संबंध बनाने होंगेl समाज में पनप रही इस बुराई पर अगर समाज के हर नागरिक ने सहयोग नहीं किया तो वह दिन दूर नहीं हिमाचल प्रदेश भी भविष्य मे इस मामले उड़ता हिमाचल के नाम से जाना जाएगा l

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