चंबा के पहाड़ों से जे एन यू (जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली) के गलियारों तक: दुर्गम वादियों की बेटी हिमानी बनीं इतिहास विषय में ऑल इंडिया टॉपर, सेल्फ स्टडी से रचा इतिहास
चंबा के पहाड़ों से जे एन यू (जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली) के गलियारों तक: दुर्गम वादियों की बेटी हिमानी बनीं इतिहास विषय में ऑल इंडिया टॉपर, सेल्फ स्टडी से रचा इतिहास
कहा जाता है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा या भूगोल की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है चंबा की होनहार बेटी हिमानी ने। सुदूर और आकांक्षी जिले (Aspirational District) चंबा की रहने वाली हिमानी ने देश के सबसे प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की परास्नातक (MA History) प्रवेश परीक्षा में पूरे भारत में EWS श्रेणी में प्रथम स्थान (All India Rank 1) प्राप्त कर पूरे हिमाचल प्रदेश एवं राजकीय महाविद्यालय चंबा का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है।
आज राजकीय महाविद्यालय चम्बा में हिमानी की उपलब्धि के लिए एक सम्मान समारोह कानायोजन किया गया। इस दौरान प्राचार्य प्रोफेसर राकेश राठौर द्वारा हिमानी को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह व पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
ज्ञात रहें हिमानी शर्मा गत सत्र में चंबा कॉलेज में इतिहास की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा रही हैं। उन्होंने बिना किसी बड़े महानगर में जाए या महंगे कोचिंग संस्थानों का सहारा लिए, केवल महाविद्यालय के प्रोफेसर के मार्गदर्शन और स्वाध्याय के बल पर यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है।
इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष मणिराज सिंह राठौड़ ने हिमानी की इस सफलता पर अत्यंत हर्ष और भावुकता व्यक्त करते हुए कहा:
"हिमानी ने देर रात फोन कर जब मुझे इस परीक्षा परिणाम की सूचना दी, तो वह हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला पल था। चंबा जैसे कठिन और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र की छात्रा जब बिना किसी बाहरी मदद या भारी-भरकम कोचिंग के, केवल सेल्फ-स्टडी से देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग की सूची में शीर्ष पायदान पर पहुँचती है, तो यह एक शिक्षक के रूप में मेरे अध्यापन के सफर की सबसे बड़ी सार्थकता और अनमोल उपहार है।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि हिमानी का यह सफर महाविद्यालय के अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा।
इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर कॉलेज के प्राचार्य राकेश राठौर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हिमानी को बधाई दी। प्राचार्य राकेश राठौड़ ने कहा:
"यह हमारे संपूर्ण महाविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। हिमानी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। महाविद्यालय प्रशासन हिमानी के उज्जवल भविष्य की कामना करता है और इतिहास विभाग के इस निरंतर प्रयास व कुशल मार्गदर्शन की सराहना करता है।"
निरंतरता और अनुशासन से पाई सफलता
अपनी इस सफलता पर हिमानी ने बताया कि निरंतरता, अनुशासन और इतिहास के प्रोफेसर मणिराज सर का कुशल मार्गदर्शन ही उनकी सफलता की मुख्य कुंजी रही।
हिमानी ने बताया कि मणिराज सर क्लास में लगातार हमें प्रेरित करते है और हमेशा बड़े सपने देखने और उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करते है।
हिमानी की इस राष्ट्रीय स्तर की सफलता पर कॉलेज प्रशासन एवं समस्त प्राध्यापकों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। चंबा की पहाड़ियों से निकलकर जेएनयू के गलियारों तक का उनका यह सफर हिमाचल के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरा है। इस अवसर पर प्रोफेसर अविनाश, प्रोफेसर मणिराज सिंह राठौर उपस्थित रहे।
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