कांगड़ा घाटी रेलवे देश की अमूल्य धरोहर, इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति
कांगड़ा घाटी रेलवे देश की अमूल्य धरोहर, इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति*
नूरपुर:-(विनय महाजन )
नूरपुर प्रदेश की कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष पी.सी. विश्वकर्मा ने रेल राज्य मंत्री को एक पत्र भेजकर कांगड़ा घाटी रेलवे की ऐतिहासिक पहचान और वर्तमान रेल सेवाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखने की मांग की है।उन्होंने कहा कि लगभग 100 वर्षों से संचालित कांगड़ा घाटी रेलवे केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था, पर्यटन और लाखों लोगों की जीवनरेखा है। इस ऐतिहासिक धरोहर के साथ किसी भी प्रकार का प्रयोग या छेड़छाड़ जनभावनाओं के विपरीत होगा।समिति ने कहा कि यदि पठानकोट क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंगों के कारण यातायात संबंधी समस्याएं हैं, तो उनका स्थायी समाधान फ्लाईओवर अथवा अंडरपास बनाकर किया जा सकता है। करोड़ों रुपये खर्च कर ऐतिहासिक रेल संचालन को सीमित करना दूरदर्शी निर्णय नहीं होगा।समिति ने यह भी कहा कि पठानकोट जंक्शन तक रेल सेवा जारी रहने से पंजाब और हिमाचल के हजारों श्रद्धालुओं, पर्यटकों, व्यापारियों, विद्यार्थियों तथा आम यात्रियों को सीधा लाभ मिलता है। मां ज्वालामुखी, मां ब्रजेश्वरी, मां चामुंडा, मां चिंतपूर्णी सहित अनेक शक्तिपीठों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह रेल सेवा अत्यंत महत्वपूर्ण है।पी.सी. विश्वकर्मा ने रेल राज्य मंत्री से आग्रह किया कि वे कांगड़ा घाटी की जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस विश्वप्रसिद्ध नैरोगेज रेल धरोहर को पूर्ण संरक्षण दें, रेल सेवाओं में कटौती के बजाय उनका विस्तार करें तथा भविष्य में इस ऐतिहासिक रेल लाइन को पर्यटन और क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय जनहित, विरासत संरक्षण तथा क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसा निर्णय लेंगे, जिससे कांगड़ा घाटी रेलवे की गौरवशाली पहचान आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके। यह जानकारी पी.सी. विश्वकर्मा अध्यक्ष, कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति मैं एक प्रेस नोट में दी हैl

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें