प्रदेश मे पंचायती राजसंस्थाओ के चुनावों को नजदीक देखते हुए सियासी पार्टियों ने अपनी अपनी मनरेगा पर राजनीति शुरू की - Smachar

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प्रदेश मे पंचायती राजसंस्थाओ के चुनावों को नजदीक देखते हुए सियासी पार्टियों ने अपनी अपनी मनरेगा पर राजनीति शुरू की

 प्रदेश मे पंचायती राजसंस्थाओ के चुनावों को नजदीक देखते हुए सियासी पार्टियों ने अपनी अपनी मनरेगा पर राजनीति शुरू की


नूरपुर : विनय महाजन /

 नूरपुर प्रदेश की सियासी पार्टियों में मनरेगा के बदले स्वरूप पर आजकल जनता मे कॉफी सियासी यंग सियासी पार्टीयो में शुरू हो गई हैl इस सियासी घमासान मे भाजपा ने कांग्रेस के 'दुष्प्रचार' पर नूरपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेता व विधायक विपिन परमार के नेतृत्व में इस विषय मे कांग्रेस का चिट्ठा खोलकर पलटवार कर दियाl इस दौरान उनके साथ नूरपुर के विधायक रणवीर सिंह निक्का, पूर्व विधायक रीता धीमान, वरिष्ठ नेता संजय गुलेरिया और जिला भाजपा अध्यक्ष राजेश उर्फ़ काका विशेष रूप से मौजूद रहे।

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप में किए गए बदलावों और नए 'विकसित भारत - ग्रामीण आय वृद्धि एवं रोजगार कानून को लेकर रही।विपन परमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और स्थानीय विधायक भवानी सिंह पठानिया मनरेगा का नाम बदलने और महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल नाम का बदलाव नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार है।

 परमार ने तर्क दिया कि जहां मनरेगा में केवल 100 दिन का रोजगार मिलता था वहीं नई योजना के तहत अब 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार मिलेगा तथा भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुरानी मनरेगा व्यवस्था में फर्जी मस्टर रोल और बिचौलियों का बोलबाला था। नई तकनीक और पारदर्शी भुगतान प्रणाली से इन घोटालों पर रोक लगेगी, जिससे कांग्रेस तिलमिलाई हुई है। विपिन परमार ने इस विषय मे भाजपा कार्यकर्ताओं से वातचीत के दौरान लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए मौजूद कार्यकर्ताओं को दिए l **नूरपुर के बीजेपी विधायक रणवीर सिंह निक्का ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे विकास के बजाय केवल "गांधी नाम" की राजनीति कर रहे हैं। निक्का ने आरोप लगाया कि नूरपुर क्षेत्र की पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर भेदभाव हो रहा है और मजदूरों को डराया-धमकाया जा रहा है। 

 उधर इंदौरा की पूर्व विधायक रीता धीमान ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने हमेशा गरीबों के कल्याण को प्राथमिकता दी है और नए कानून से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को अधिक काम और बेहतर दिहाड़ी मिलेगी। उधर इस मामले में कांग्रेस नेता नूरपुर मे अभी तक इस मामले मे आखिरकार चुप क्यों है? ऐसी चर्चा क्षेत्र में चर्चित हैं कि आखिरकार अजय महाजन नूरपुर की राजनीति में अपने पते क्यों नहीं खोल रहे? प्रदेश मे पंचायती राजसंस्थाओ के चुनावों को नजदीक देखते हुए सियासी पार्टियों ने अपनी अपनी मनरेगा पर राजनीति शुरू की 

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