बाबा आदम के जमाने वाले ढर्रे पर चल रहे प्रदेश के टोल बैरियर
बाबा आदम के जमाने वाले ढर्रे पर चल रहे प्रदेश के टोल बैरियर
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर प्रदेश में प्रवेश करने पर सरकार ने टोल बैरियर लगाए हुए हैं। जहां प्रवेश करने पर वाहनों को उनकी क्षमता अनुसार शुल्क देना पड़ता है। प्रदेश में चंद एक बैरियर ही ऐसे हैं जहां पर फास्ट टैग से यह शुल्क वसूला जाता है। अधिकांश पर शुल्क की पर्ची बैरियर पर तैनात कर्मियों द्वारा काटी जाती है। मैन्युअल ढंग से उगाहे जाने वाले इस शुल्क को लेने में काफी समय लग जाता है। इस कारण इन बैरियरों पर वाहनों की लंबी कतारें अक्सर देखी जा सकती हैं। जब तक पहला वाहन शुल्क देकर आगे निकलता है तब तक वह वाहन भी नहीं निकल पाते जो प्रदेश में पंजीकृत होने कारण शुल्क से मुक्त होते हैं। प्रदेश के प्रमुख ऐसे टोल बैरियर में से एक, यानी कंडवाल के बैरियर पर भी मैन्युअल सिस्टम होने कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है यहां पर सिंगल रोड पर नाका लगा है आगे निकलने के लिए बने भाग को अक्सर बंद रखा जाता है जिस कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
इस मामले मे अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संघ के सहानिदेशक राजेश पठानिया का कहना है। कि चर्चा है कि यह बैरियर अप्रैल मास से ही विवादित रहा है और टोल कंपनी को कराधान विभाग का वरदहस्त प्राप्त है। और कराधान विभाग को लोगों द्वारा बहुत सारी शिकायतें इस टोल बैरियर के विरुद्ध दी गई हैं। परंतु विभाग किसी भी शिकायत पर सार्थक समाधान न देकर टोल कंपनी की तरफदारी करता है। जबकि माननीय उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश ने भी सरकार से जवाब मांगा है और हिमाचल के साथ मुख्य बैरियरों को, जो की अवैध तरीके से लगाए गए हैं। एक जनहित याचिका जो माननीय उच्च न्यायालय में दी गई थी। उस पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि प्रदेश सरकार को चाहिए कि इन बैरियरों की अवैध उगाही तुरंत प्रभाव से बंद की जाए। और जनता को राहत दी जाए।

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