दस वर्षों बाद गांव दुआड़ा में गूंजा क्रिकेट का रोमांच, युवाओं के जज़्बे से साकार हुआ ‘दुआड़ा कप’ - Smachar

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दस वर्षों बाद गांव दुआड़ा में गूंजा क्रिकेट का रोमांच, युवाओं के जज़्बे से साकार हुआ ‘दुआड़ा कप’

 दस वर्षों बाद गांव दुआड़ा में गूंजा क्रिकेट का रोमांच, युवाओं के जज़्बे से साकार हुआ ‘दुआड़ा कप’


मनाली : ओम बौद्ध /

लगभग एक दशक के लंबे इंतजार के बाद गांव दुआड़ा के युवाओं ने वह कर दिखाया, जो कभी सिर्फ एक सपना था। कठिन परिस्थितियों, संसाधनों की कमी और तमाम अड़चनों के बावजूद युवाओं ने अपने दम पर खेल मैदान तैयार किया और अब उसी मैदान पर “दुआड़ा कप” क्रिकेट प्रतियोगिता का सफल आयोजन कर गांव को खेलों की नई पहचान दी है। यह आयोजन न केवल खेल भावना का प्रतीक है, बल्कि समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का सशक्त प्रयास भी बनकर उभरा है।

गांव दुआड़ा में वर्षों से खेल मैदान का अभाव रहा। युवाओं में क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि होने के बावजूद अभ्यास और प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त स्थान नहीं था। कई बार प्रयास शुरू हुए, लेकिन संसाधनों और सहयोग के अभाव में वे अधूरे रह गए। बावजूद इसके, युवाओं का हौसला कभी कमजोर नहीं पड़ा। आखिरकार सामूहिक प्रयास, श्रमदान और आपसी सहयोग से युवाओं ने बड़ी मुश्किलों के बीच खेल मैदान को तैयार किया। पत्थरों को हटाना, समतलीकरण करना और खेलने लायक बनाना आसान नहीं था, लेकिन युवाओं ने इसे अपने संकल्प से संभव कर दिखाया।

इसी मेहनत का परिणाम है कि आज गांव दुआड़ा में क्रिकेट दुआड़ा कप का आयोजन सफलतापूर्वक हो रहा है। प्रतियोगिता में अब तक क्षेत्र की 20 से अधिक टीमों ने भागीदारी की है, जबकि आने वाले दिनों में और भी टीमों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल गांव बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी खेल के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है।

इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य केवल खेल तक सीमित नहीं है। आयोजक युवाओं का स्पष्ट संदेश है—“खेलें, आगे बढ़ें और नशे से बचे।” आज के दौर में नशा युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। दुआड़ा के युवाओं ने खेल को माध्यम बनाकर नई पीढ़ी को नशे से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देने का बीड़ा उठाया है। क्रिकेट के माध्यम से अनुशासन, टीम भावना, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण जैसे गुणों को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मैचों के दौरान दर्शकों की भारी उपस्थिति यह दर्शाती है कि गांव के लोग भी इस पहल को पूरा समर्थन दे रहे हैं। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर वर्ग में उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की प्रतियोगिताएं गांव के माहौल को सकारात्मक बनाती हैं और युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देती हैं।

दुआड़ा कप केवल एक क्रिकेट प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं के अथक प्रयास, एकता और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। यह आयोजन साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े बदलाव संभव हैं। गांव दुआड़ा के युवाओं ने यह संदेश दिया है कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक आंदोलन भी बन सकता है जो युवाओं को आगे बढ़ने का जज़्बा दे और उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखें।

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