“8 अप्रैल भी सूखा दिन” — कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में सैलरी-पेंशन पर ब्रेक, कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
“8 अप्रैल भी सूखा दिन” — कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में सैलरी-पेंशन पर ब्रेक, कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
पालमपुर
हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में कर्मचारियों की जेबें लगातार खाली ही रह गई हैं। 8 अप्रैल तक भी मार्च महीने की सैलरी और पेंशन डिसबर्स न होने से कर्मचारियों, वैज्ञानिकों और प्राध्यापकों में जबरदस्त रोष फैल गया है। हर बीतता दिन कर्मचारियों की आर्थिक चिंता को और गहरा करता जा रहा है।
नॉन टीचिंग एम्पलाइज यूनियन के जनरल सेक्रेटरी नरेश कुमार शर्मा ने कड़े शब्दों में नाराजगी जताते हुए कहा कि अब यह देरी “रूटीन समस्या” बन चुकी है। हर दूसरे-तीसरे महीने सैलरी और पेंशन में देरी होना कर्मचारियों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अप्रैल महीना खर्चों का दबाव लेकर आता है—बच्चों की एडमिशन, क्वार्टर का किराया, घरेलू जरूरतें—ऐसे में वेतन न मिलना कर्मचारियों को आर्थिक रूप से तोड़ रहा है। बैंक लोन की किश्तें अटक रही हैं, पेनल्टी लगने का खतरा बढ़ रहा है और कई कर्मचारी डिफॉल्टर बनने की कगार पर पहुंच रहे हैं।
नरेश कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह स्थिति साफ तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने मांग की कि इस समस्या का स्थायी समाधान तुरंत निकाला जाए।
आज पूरे दिन कर्मचारी अपने-अपने बैंक खातों को चेक करते रहे, एक-दूसरे से पूछते रहे, लेकिन शाम 5 बजे तक भी सैलरी और पेंशन मिलने को लेकर कोई स्पष्ट सूचना नहीं मिली।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जिस तरह अन्य सरकारी विभागों में हर महीने की पहली तारीख को वेतन और पेंशन सुनिश्चित की जाती है, उसी तरह विश्वविद्यालय में भी यह व्यवस्था लागू की जाए, ताकि कर्मचारियों को बार-बार इस मानसिक और आर्थिक तनाव से न गुजरना पड़े।

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