मिडिल ईस्ट में सीजफायर का ऐलान: अमेरिका में राहत, लेकिन ट्रंप के खिलाफ व्हाइट हाउस पर फूटा गुस्सा

मिडिल ईस्ट में सीजफायर का ऐलान: अमेरिका में राहत, लेकिन ट्रंप के खिलाफ व्हाइट हाउस पर फूटा गुस्सा

वॉशिंगटन डीसी: मिडिल ईस्ट में एक महीने से जारी भारी तनाव के बाद आखिरकार दो हफ्तों के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा कर दी गई है। ईरान और अमेरिका समेत कई देशों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे वैश्विक शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि, इस घोषणा के बावजूद अमेरिका के भीतर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

व्हाइट हाउस के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन

सीजफायर का ऐलान होते ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारी न केवल युद्धविराम से असंतुष्ट दिखे, बल्कि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तत्काल इस्तीफे की मांग शुरू कर दी।

प्रदर्शनकारियों की मांग: लोगों का कहना है कि वे आगामी चुनावों तक इंतजार नहीं कर सकते और मौजूदा प्रशासन को तुरंत सत्ता छोड़नी होगी।

गंभीर आरोप: प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति पर "युद्ध अपराधों" और दुनिया भर में "क्रूरता" को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं।

"हम आज रात यहाँ इसलिए आए हैं क्योंकि हम मौजूदा हालात को बर्दाश्त नहीं कर सकते। इस देश और दुनिया भर में जो हो रहा है, उसे अभी रोकना होगा। केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि इस पूरे शासन को जाना होगा। "

— मॉर्गन टेलर, प्रदर्शनकारी

सीजफायर के मायने: राहत या नई चुनौती?

मिडिल ईस्ट में दो हफ्तों का यह युद्धविराम ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि:

वैश्विक राहत: ईरान के साथ तनाव कम होने से तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा को लेकर दुनिया ने राहत की सांस ली है।

अमेरिकी असंतोष: सीजफायर के बावजूद, ट्रंप प्रशासन के खिलाफ आंतरिक विरोध इस बात का संकेत है कि जनता युद्ध और प्रशासन की विदेश नीति से बेहद नाराज है।

सड़कों पर संग्राम: प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक मौजूदा शासन सत्ता से बाहर नहीं होता, वे हर दिन सड़कों पर उतरेंगे।


टिप्पणियाँ

खबर को दोस्तों के साथ साझा करें:


हिमाचल मीडिया से जुड़ें: