नगर परिषद नूरपुर मे जनता को मिले 5 साल अश्वासन, आपसी मिली भक्त में टेंडरो के होते रहे आवंटन
नगर परिषद नूरपुर मे जनता को मिले 5 साल अश्वासन, आपसी मिली भक्त में टेंडरो के होते रहे आवंटन
कुछ ठेकेदारों के इर्द गिर्द घूमती रही परिषद की करगुजारी
नूरपुर : विनय महाजन /
नूरपुर प्रदेश के पांच साल का कार्यकाल खत्म होते ही एक बार फिर नगर परिषद चुनाव सिर पर आ खड़े हुए हैं और इसके साथ ही विकास के बड़े-बड़े दावे भी तेज हो गए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि पूरे कार्यकाल के दौरान नूरपुर शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहीं।शहर के पार्क आज भी बदहाली का शिकार हैं। न तो उनका सौंदर्यीकरण हो पाया और न ही लोगों के बैठने और घूमने के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकीं। वहीं, पार्किंग की समस्या भी लगातार गंभीर बनी रही। ट्रैफिक समस्या जस की तस रही । अबैध कब्जे भी जनता की जुबान पर चर्चा का विषय इन चुनावों मे मतदाताओं की जुबान पर चर्चित हैl परिषद में कई योजनाएं बनाई गईं लेकिन वे फाइलों से बाहर नहीं निकल सकीं।कूड़ा-कर्कट की समस्या भी नगर परिषद के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। घर-घर कूड़ा उठाने की योजना को बड़े स्तर पर प्रचारित किया गया लेकिन यह योजना पूरी तरह सफल नहीं हो पाई और सड़कों की हालत भी लंबे समय तक खराब बनी रही। हालांकि, कार्यकाल के आखिरी महीनों में मुख्य सड़क का जीर्णोद्धार जरूर किया गया जिसे बीजेपी परिषद मे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि पांच साल में सिर्फ एक काम को उपलब्धि बताकर क्या बाकी कमियों को नजरअंदाज किया जा सकता है? 5 साल की नगर परिषद में एक कार्यकारी प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका भी परिषद में कामों को लेकर के चर्चा के विषय में रही जनता के जुवान पर चर्चित है l प्रचार के दौरान लगे चुनावी बोर्डो मेंभी चर्चा का विषय बना हुआ है केंद्रीय नेताओं के नाम पर प्रचार किया जा रहा है वोट लेने के लिए आखिरकार क्यों?सबसे बड़ी बात यह रही कि परिषद अपने पूरे कार्यकाल में न तो कोई ठोस बजट तैयार कर पाई और न ही शहर के विकास के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप बना सकी। बड़ी हैरानी के बात यह है कि कुछ बार्ड मेंबरों को पता ही नहीं होता था कि परिषद में क्या काम हो रहा हैl परिषद की कई संपत्तियों को भी ऑफ द रिकॉर्ड बेचने का आरोप जनता में चर्चित है l ऐसी चर्चा क्षेत्र में चर्चित हैं कि नगर परिषद का चुनाव किसी राष्ट्रीय पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं हो रहा है फिर भी इस मामले में प्रचार सिर्फ वोट लेने के लिए किया जा रहा है l देखना है कि ऊंट किस तरफ करवट लेगा आखिरकार चाबी तो मतदाताओं के पास l उधर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी वर्ग इन चुनावों में स्वर्गीय आरके महाजन के परिषद में काफी लंबे समय तक प्रधान रहते हुए हुए विकास कार्यों के नाम पर एक बार फिर मतदाताओं के पास वोट मांग रहा हैl स्वर्गीय आरके महाजन की धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णा महाजन भी नगर परिषद में प्रधान के पद पर एक अच्छा काम कर चुकी है लेकिन पिछली बार उन्हें बार्ड 9 मे टॉस के माध्यम से चुनाव हारना पड़ा l इस वार स्वर्गीय आरके महाजन की पुत्रवधू नीति महाजन पत्नी गौरव महाजन पूर्व नगर पार्षद वार्ड नंबर 4 जिन्हें आगामी नगर परिषद का प्रधान के लिए मैदान मे उतारा गया है जो अपने पतिदेव के बार्ड 4से चुनाव लड़ रही है l पूर्व विधायक अजय महाजन के निर्देश पर अपनी टीम के साथ एक बार व्यवस्था परिवर्तन सरकार की नीतियों को लेकर मतदाताओं से आग्रह कर रही है कि हमारे परिवार को एक बार मौका दिया जाये l इस मामले में नीति महाजन का कहना है कि स्व आर के महाजन परिवार के द्वारा अपने कार्यकाल में करवाए गए विकास कार्यों को लेकर खुद मतदाताओं से वोट देने का आग्रह कर रही है ताकि शहर का विकास हो सके l मामले में स्वर्गीय आरके महाजन के भ्राता योगेश महाजन जो हिमाचल प्रदेश वन निगम के निदेशक है उन्होंने भी परिषद में कांग्रेस का परचम लहराने के लिए मतदाताओं के दरबार में हाजरी लगानी शुरू कर दी है l अब देखने की वात यह है कि मतदाता इस मामले में क्या निर्णय करते हैंl

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