केरल बना लोकतंत्र और भाईचारे की मिसाल, धर्म नहीं इंसानियत के नाम पर पड़ा वोट : सन्नी ईप्पन
केरल बना लोकतंत्र और भाईचारे की मिसाल, धर्म नहीं इंसानियत के नाम पर पड़ा वोट : सन्नी ईप्पन
धार्मिक विभाजन की राजनीति को जनता ने किया खारिज, कहा- पूरे देश को सीख दे रहा केरल
मंडी : अजय सूर्या /
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सह संयोजक सन्नी ईप्पन ने केरल विधानसभा चुनाव परिणामों को लोकतंत्र, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि केरल ने पूरे देश को यह संदेश दिया है कि जनता अब धर्म और जाति के नाम पर नहीं बल्कि इंसानियत, शिक्षा, विकास और स्वच्छ छवि वाले नेताओं के नाम पर वोट डाल रही है। उन्होंने कांग्रेस की जीत पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से कुछ राजनीतिक ताकतों द्वारा केरल में धर्म के नाम पर विभाजन पैदा करने का भरपूर प्रयास किया गया, लेकिन वहां की जागरूक जनता ने ऐसी राजनीति को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने कहा कि केरल का यह नजारा देश के लिए एक बेहतरीन मिसाल बनता है। यह एक ऐसा राज्य है जहां लोग सबसे पहले इंसानियत को देखते हैं, जाति या मजहब को नहीं। सन्नी ईप्पन ने कहा कि चुनाव परिणामों में 41 हिंदू विधायक, 31 ईसाई विधायक और 30 मुस्लिम विधायक चुने जाना इस बात का प्रमाण है कि वहां मतदाता उम्मीदवार की सोच, शिक्षा और कार्यशैली को महत्व देते हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बहुल तवानूर विधानसभा क्षेत्र से ईसाई समुदाय के वीएस जॉय का जीतना, हिंदू बहुल क्लामासैरी क्षेत्र से मुस्लिम उम्मीदवार ई. अब्दुल गफूर का विधायक चुना जाना और ईसाई बहुल कोच्चि से मुस्लिम उम्मीदवार मोहम्मद शियास की जीत लोकतंत्र की असली खूबसूरती को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने ‘केरल स्टोरी’ जैसी फिल्म बनाकर धार्मिक विभाजन और समाज में फूट डालने का प्रयास किया, लेकिन केरल की जनता ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। ईप्पन ने कहा कि देश को ऐसे ही लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक भाईचारे की आवश्यकता है, जहां नेता को उसके धर्म या जाति से नहीं बल्कि उसके काम और चरित्र से आंका जाए। उन्होंने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में केरल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी वहां से सकारात्मक संदेश लेकर लौटेंगे और हिमाचल में भी ऐसी समावेशी राजनीति को बढ़ावा मिलेगा।

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