विश्व पर्यटन मंच पर छाया नाट आन मैप का एचटूओ हाउस, रिस्पांसिबल टूरिज्म माडल ने खींचा सबका ध्यान
विश्व पर्यटन मंच पर छाया नाट आन मैप का एचटूओ हाउस, रिस्पांसिबल टूरिज्म माडल ने खींचा सबका ध्यान
लोगों को चलो चंबा अभियान पर दी जानकारी, चंबा आने व यहां की कला-संस्कृति से जुड़ने के लिए किया आमंत्रित
चंबा : जितेन्द्र खन्ना /
केरल के बेयपोर में सात से आठ फरवरी तक अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल रिस्पांसिबल टूरिज्म मीट में हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा के नाट आन मैप एचटूओ हाउस की सफलता की गूंज सुनाई दी। चंबा जिला से शुरू हुए इस अनूठे प्रोजेक्ट ने वैश्विक मंच पर जिम्मेदार पर्यटन की एक नई मिसाल पेश की है। आज नाट आन मैप प्रदेश व देश के विभिन्न स्थानों पर समुदाय आधारित रिस्पांसिबल टूरिज्म को लेकर कार्य कर रहा है। नाट आन मैप के माडल को लोगों के साथ साझा किया गया, जिसे लोगों की ओर से काफी सराहना मिली। सम्मेलन के विशेष सत्र रिस्पांसिबल टूरिज्म इन एक्शन में विशेषज्ञों ने माना कि एचटूओ हाउस का माडल न केवल स्थानीय विरासत को सहेज रहा है, बल्कि जल संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन को जोड़ने का दुनिया का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। चलो चंबा अभियान के तहत नाट आन मैप एचटूओ हाउस की प्रतिनिधि रेनू शर्मा ने सम्मेलन के दूसरे दिन विस्तृत प्रस्तुति दी, जबकि मगनदीप ने समुदाय का पक्ष रखते हुए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। रेनू शर्मा ने बताया कि स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पर्यटन को समावेशी बनाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा कि एचटूओ हाउस पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है। रेनू शर्मा ने बताया कि नाट आन मैप एचटूओ हाउस पूरी तरह से समुदाय आधारित माडल है, जिसे स्थानीय लोग और स्वयं सहायता समूह मिलकर चलाते हैं। सम्मेलन में यहां के सामुदायिक महिला किचन को विशेष रूप से हाइलाइट किया गया, जो महिला सशक्तिकरण का जीता-जागता उदाहरण है। यहां घराट संस्कृति का संरक्षण करते हुए इसे स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया गया है। अधिक से अधिक लोगों को एक साथ जोड़ा जा रहा है। साथ ही ग्रामीण माडल के तहत कार्य किया जा रहा है। इस दौरान चलो चंबा अभियान के बारे में भी उपस्थित लोगों को बताया गया। साथ ही लोगों को चंबा आने व यहां की कला व संस्कृति को समझने सहित उस पर काम करने के लिए साथ मिलकर कार्य करने के लिए आमंत्रित किया गया, ताकि चंबा जिला को भी केरल की तरह रिस्पांसिबल टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाया जा सके।
वहीं, मगनदीप ने कहा कि संस्कृति के संरक्षण के साथ ही लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने को लेकर कार्य किया जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के प्रति लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। उन्हें यह बताया जा रहा है कि प्राकृतिक व सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए आगे बढ़ा जा सकता है। इसके साथ ही पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
बेयपोर के मालाबार मरीना कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केरल के पर्यटन मंत्री पीए मोहम्मद रियास ने किया। जबकि, समापन समारोह में केरल रिस्पांसिबल टूरिज्म मिशन सोसायटी के सीईओ एवं ग्लोबल अवार्ड विनर रुपेश कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस दौरान रिस्पांसिबल टूरिज्म पार्टनरशिप के प्रबंध निदेशक डा. हेरोल्ड गुडविन ने वैश्विक स्तर पर पर्यटन को टिकाऊ बनाने पर चर्चा की। सिडनी यूनिवर्सिटी के प्रो. जोसेफ एम चीर ने इसके सामाजिक प्रभावों पर बात रखी। वहीं, यूएन विमेन की प्रतिनिधि रूपा नायक ने पर्यटन क्षेत्र को महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी बनाने पर जोर दिया।
सम्मेलन में केरल के पूर्व मुख्य सचिव डा. वेणु वी, केरल पर्यटन की निदेशक सुधा देवी आर, जेम्स थार्नटन और रवि शंकर जैसे विशेषज्ञों ने भी ग्रीन टूरिज्म और तकनीकी समाधानों पर अपने विचार साझा किए। समापन पर संकल्प लिया गया कि पर्यटन को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का जरिया बनाया जाएगा।
केरल के बेयपोर में आयोजित ग्लोबल रिस्पांसिबल टूरिज्म मीट में शामिल होना हमारे लिए गर्व की बात है। मैं केरल रिस्पांसिबल टूरिज्म के सीईओ रूपेश कुमार का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने हमारे समुदाय आधारित पर्यटन माडल को सराहा और हमें यहां वैश्विक मंच पर इसे प्रस्तुत करने का अवसर दिया। इस सम्मेलन में जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, नेपाल और यूरोप जैसे कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। हिमाचल प्रदेश से हमारे माडल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। मैं इस सफलता के लिए अपने समुदाय, गांव के लोगों और टीम के सभी सदस्यों का शुक्रिया अदा करती हूं और आशा करती हूं कि भविष्य में भी हमें ऐसे ही गौरवशाली क्षण मिलते रहेंगे।
नाट आन मैप अब केवल चंबा या हिमाचल तक सीमित नहीं है। हम इस माडल को देश के विभिन्न राज्यों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित कर रहे हैं। हमारा मिशन पूरे भारत में ऐसे रिस्पांसिबल टूरिज्म डेस्टिनेशन तैयार करना है, जहां पर्यटन का सीधा लाभ वहां रहने वाले अंतिम व्यक्ति और समुदाय को मिले। चंबा से शुरू हुई यह मशाल देश में ग्रामीण सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की रोशनी फैला रही है। हमारा उद्देश्य पर्यटन को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर, उसे जड़ों से जुड़ने और स्वरोजगार का जरिया बनाना है।


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