भाजपा ने रखी विकास की नींव, कांग्रेस ने किया जनता के भरोसे से विश्वासघात
भाजपा ने रखी विकास की नींव, कांग्रेस ने किया जनता के भरोसे से विश्वासघात
अधूरे भवन, ठप योजनाएं, किराए की संस्थाएं और अदालतों में उलझी सरकार : विपिन सिंह परमार
पालमपुर
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार आज जिस तथाकथित “व्यवस्था परिवर्तन” का ढोल पीट रही है, उसकी वास्तविक तस्वीर सुलह विधानसभा क्षेत्र की ज़मीन पर खड़ी अधूरी इमारतों, ठप पड़ी योजनाओं और जर्जर ढांचों में साफ़ दिखाई देती है। ये अधूरे भवन केवल प्रशासनिक विफलता नहीं हैं, बल्कि जनता के साथ किया गया खुला और सुनियोजित विश्वासघात हैं।
अख़बारों में प्रकाशित एक के बाद एक रिपोर्ट यह प्रमाणित करती हैं कि सुलह क्षेत्र में पंचायत भवनों से लेकर आईटीआई, किसान भवन, अस्पतालों के अतिरिक्त भवन और फार्मेसी कॉलेज जैसी लगभग हर महत्वपूर्ण योजना भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में स्वीकृत हुई, बजटेड हुई और ज़मीन पर उतरी। लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इन योजनाओं को या तो ठंडे बस्ते में डाल दिया या जानबूझकर अधर में लटका दिया।
पांच साल से पंचायतें भवनों को तरस रहीं—यह लापरवाही नहीं, साज़िश है
सुलह विधानसभा क्षेत्र में गठित 14 नई पंचायतों को बने पांच वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। पूर्व भाजपा सरकार ने प्रत्येक पंचायत के लिए 33-33 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी। कई पंचायतों में निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार की निष्क्रियता के कारण आज भी पंचायतें किराए के कमरों, निजी भवनों या अस्थायी स्थानों से चल रही हैं।
यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास है।
आईटीआई रंघू—युवाओं के भविष्य पर कांग्रेस का ताला
2019 में भाजपा सरकार ने रंघू में आईटीआई की स्थापना की। 11.78 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, 460.21 लाख रुपये की पहली किश्त जारी हुई और भवन निर्माण शुरू हुआ।
लेकिन आज तीन साल बाद भी भवन मात्र 30 प्रतिशत ही बन पाया है। छात्र आज भी जर्जर और अस्थायी भवनों में तकनीकी शिक्षा लेने को मजबूर हैं। कांग्रेस सरकार ने न तो धन की निरंतर व्यवस्था की और न ही निर्माण एजेंसी पर कोई जवाबदेही तय की। यह युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
फार्मेसी कॉलेज—किराए के भवन में चलती कक्षाएं, कांग्रेस की घोर विफलता
सुलह विधानसभा क्षेत्र में फार्मेसी कॉलेज की स्थापना भाजपा सरकार की दूरदर्शी सोच का परिणाम थी। कॉलेज स्वीकृत हुआ, भवन निर्माण शुरू हुआ और बजट भी तय किया गया।
लेकिन आज स्थिति यह है कि फार्मेसी कॉलेज की कक्षाएं किराए के भवन में चलाई जा रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। तीन वर्षों का समय मिलने के बावजूद कांग्रेस सरकार कॉलेज का भवन पूरा कराने में पूरी तरह असफल रही। यह तकनीकी और स्वास्थ्य शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है।
किसान भवन—नाम बड़ा, कांग्रेस की नीयत छोटी
रमेहड़ पंचायत में किसान भवन के लिए 1.53 करोड़ रुपये का बजट भाजपा सरकार के समय स्वीकृत हुआ और शिलान्यास भी हुआ। उद्देश्य किसानों को स्थायी मंच देना था।
चार साल बीत जाने के बाद भी भवन अधूरा है। आज किसान पूछ रहा है—जब पैसा था, योजना थी और काम शुरू हो चुका था, तो कांग्रेस सरकार ने इसे पूरा क्यों नहीं किया? कांग्रेस के पास इसका कोई जवाब नहीं है।
अस्पतालों के अधूरे भवन—जनस्वास्थ्य से अपराध
भवारना, धीरा और थुरल अस्पतालों के अतिरिक्त भवनों की स्थिति और भी शर्मनाक है—
भवारना अस्पताल: 24.30 करोड़ रुपये स्वीकृत
थुरल अस्पताल: 18.42 करोड़ रुपये स्वीकृत
धीरा अस्पताल: अतिरिक्त भवन की पूरी योजना और बजट तय
भाजपा सरकार के समय शिलान्यास हुआ, राशि जारी हुई और निर्माण शुरू हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार के राज में ये भवन पिछले सात वर्षों से अधूरे पड़े हैं। मरीजों को अव्यवस्था, भीड़ और संसाधनों की भारी कमी झेलनी पड़ रही है।
कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली—नीतिगत समाधान नहीं, सुप्रीम कोर्ट में SLP
आज प्रदेश में आम धारणा बनती जा रही है कि कांग्रेस सरकार समस्याओं का समाधान ज़मीन पर नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल करके ढूंढ रही है।
कुछ उदाहरण सरकार की असल मानसिकता उजागर कर देते हैं—
भूमि मुआवज़ा (Factor-2) पर फैसला आते ही SLP
पंचायती राज चुनाव पर न्यायिक आदेश → तुरंत SLP
कर्मचारियों के लाभ, एरियर और पेंशन पर आदेश → फिर SLP
यानी मुद्दा सुलझाने की जगह, उसे आगे टालने की रणनीति।
सरकार अब निर्णय लेने वाली नहीं, बल्कि हर विषय को अदालतों में उलझाने वाली बन चुकी है।
वकीलों की फीस है, जनता के हक़ के लिए पैसा नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या कांग्रेस सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में महंगे वकीलों को भारी-भरकम फीस देने के लिए पैसा है,
लेकिन किसानों को मुआवज़ा देने, पंचायतों को भवन देने, कर्मचारियों को उनका हक़ देने और छात्रों को स्थायी शैक्षणिक संस्थान देने के लिए नहीं?
जब एक ओर अधूरे पंचायत भवन, ठप अस्पताल, अधूरा आईटीआई, किराए के भवन में चलता फार्मेसी कॉलेज और लटकी विकास योजनाएं हों,
और दूसरी ओर करोड़ों रुपये कानूनी लड़ाइयों पर खर्च किए जाएं—
तो यह साफ़ हो जाता है कि कांग्रेस सरकार के लिए जनता नहीं, केवल टालमटोल और राजनीतिक बचाव प्राथमिकता है।
जनता सब देख रही है
हिमाचल की जनता अब गुमराह होने वाली नहीं है।
उसे साफ दिखाई दे रहा है—
भाजपा ने विकास की नींव रखी,
कांग्रेस ने उस विकास को रोक दिया।
आने वाला समय इस नाकाम, दिशाहीन और विकास-विरोधी सरकार का हिसाब जरूर लेगा।
कांग्रेस सरकार को जनता के सवालों से भागने नहीं दिया जाएगा।

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